Chhote-Chhote Bade Yuddh

Ramdhari Singh Diwakar

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  • Year: 2017

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Arya Prakashan Mandal

  • ISBN No: 978-81-934325-0-1

ग्रामीण जीवन के सुप्रसिद्ध  कथाशिल्पी रामधारी सिंह दिवाकर ने मुख्यतः बदलते हुए गांव को अपने उपन्यासों और कहानियों का उपजीव्य बनाया है। इनकी रचनाओं में गांव को लेकर कोई अतीत-राग नहीं, अपितु लोकतांत्रिक अधिकार-चेतना से दीप्त प्रवंचितों, दलितों और सीमांत की जिंदगी जीने वाले चरित्रों के चेहरे हैं। गांव की सामंती व्यवस्था के टूटने के बरक्स हाशिये पर पडे़ लोगों के उभार के शुभ-अशुभ पक्षों को दिवाकर ने अपने कथा-साहित्य में पूरी संलग्नता के साथ उकेरा है।
प्रस्तुत संग्रह छोटे छोटे बड़े युद्ध की शीर्षक कहानी में दिवाकर की लेखकीय विशिष्टता का आभास मिलता है। सड़ांध भरे गांव के विरूपित चेहरे की कहानी ‘माहुर पानी’ आज के दारुण यथार्थ की साक्षी है कि किसी स्वप्नदर्शी बुद्धिजीवी का शहर से अपने गांव लौटना और सुकून भरी जिंदगी जी सकना कितनी प्राणांतक आपदाओं से घिरा है। अपनी कहानियों में रामधरी सिंह दिवाकर संकीर्ण होती मनुष्यता को भी रेखांकित करते हैं।
विषय की दृष्टि से संग्रह की कहानियां बहून्मुखी हैं। कहानियों में न शिल्प का चमत्कार है, न भाषा का ‘मैनरिज्म’! सहज-सरल भाषा में लिखी गई इन कहानियों में विलक्षण आत्मीयता है जो पाठक को प्रभावित करती है।

Ramdhari Singh Diwakar

रामधारी सिंह दिवाकर
बिहार के गॉव नरपतगंज (जिला अररिया) में 1 जनवरी, 1945 को एक निम्न-मध्यवर्गीय किसान परिवार में जन्म ।
आरंभिक शिक्षा गांव के स्कूलों और महाविद्यालयी शिक्षा फारबिसगंज और मुजफ्फरपुर में। भागलपुर विश्वविद्यालय से एम०ए० हिंदी ।
'जैनेंद्र की भाषा' शोध-प्रबंध पर भागलपुर विश्वविद्यालय से पी-एच०डी० की उपाधि ।
1967 से महाविद्यालयों में अध्यापन-कार्य । मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के स्नातकोत्तर हिंदी विभाग  में प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष ।  प्रतिनियुक्ति पर 1997 में बिहार राष्ट्रभाषा परिषद पटना के निदेशक-पद पर कार्यरत ।
पहली कहानी 'नई कहानियाँ' के जून, 1971 के अंक में प्रकाशित । तब से अनवरत लेखन । हिन्दी की तमाम प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में शताधिक कहानियाँ, उपन्यास आदि प्रकाशित
प्रकाशित कृतियाँ 
कहानी-संग्रह : 'नए गाँव में', 'अलग-अलग अपरिचय', 'बीच से टूटा हुआ', 'नया घर चढे', 'सरहद के पार', 'मखान पोखर', 'माटी-पानी'
उपन्यास : 'क्या घर क्या परदेस', 'काली सुबह का सूरज', 'पंचमी तत्पुरूष', 'आग-पानी प्रकाश', 'टूटते दायरे'
संपादित : कथा भारती, गल्प भारती

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