Encounter-E-Love Story Tatha Anya Prem Kahaniyan

Shyam Sakha 'Shyam'

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  • Year: 2013

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Suhani Books

  • ISBN No: 9789380927305

एनकाउंटर-ए-लव स्टोरी तथा अन्य प्रेम कहानियां
डॉ. श्याम सखा 'श्याम' की कहानियां, देह में आती-जाती ठहरती-बिछलती सांसों की तरह हैं। इनमें आशाओं की ऊष्मा है, निराशा की ठंडक है, उत्साह और आत्मविश्वास की आंच हैं। इन कहानियों का आकार भी सांसों की ही तरह लघु-दीर्घ और मदमय है, सब कुछ अनायास और निश्चित, एक लय-ताल में बद्ध । कहीं छोटी भी ही सांस में देह में दीप्ति है तो कहीं दीर्घ श्वास ने पूरी काया को कंपित कर दिया है।
जैसे श्यास ही जीवन का सूचक है, वैसे ही कहानी की रोचक वस्तु ही प्राणधार है। सेक्स की लंतरानी को जगह प्रेम की फुहार हैं। यहां रंगरलियां नहीं हैं, अंगरलियां हैं और उसकी स्वनिर्मित सैंद्धन्तिकी भी हैं। पठनीयता इस कदर कि हाथ से कहानी रखते न बने; गालिब की भाषा में 'बुझाए न बने ' सी हालत.. बस संग्रह की हर कहानी ऐसी ही आतिश है जिस पर कांई जोर नहीं चलता।
इन कहानियों का कैनवास बहुत बड़ा है। सभी वर्गों की जिंदगियां यहां हाथ उठाए खडी हैं कि पहले हमारी तरफ देखो । पाठक विस्मय से इन सबकी ओर उत्सुक भाव से देखता है । वह जिसका हाथ पकड़ लेता है, वही उसे एक ऐसे अनुभव संसार में ल जाती है जो उसके लिए अपरिचित भले न हो परंतु परिचित भी नहीं था; जैसे कोई किमी मुहल्ले के मुहाने तक तो पहुंचा हो, परंतु भीतर कभी न जा सका हो।
ये कहानियां, मन और ममाज के ऐसे ही अल्प-परिचित मुइल्लों में पाठक को खींच ले आती हैं। श्याम सखा 'श्याम' एक समर्थ कथाकार है, कहना चाहिए कि इंसानी जिंदगी के कुशल लेखा-जोखाकार हैं। इनकी नाप-जोख, ऐसी जानी पहचानी और अपनत्व वाली भाषा में है जी पल भर का भी पराई नहीं लगती।
एक ओर किशोर प्रेम की कोमलांगी कहानी रसभरी पाठक को उसकी अपनी किशोर अवस्था के स्नेह कणों से भिगो देती है तो दूसरी ओर प्रेमिका की मजबूरी व एनकाउंटर- ए-लव स्टोरी प्रेम के भयावह यथार्थ को उकेरती सफल कहानियां हैं। एनकाउंटर शब्द प्रेम के साथ अजीब लगते हुए भी कहानी शीर्षक की सार्थकता को सिद्ध करने में सफल है ।

Shyam Sakha 'Shyam'

डॉ. श्याम सखा 'श्याम'
जन्म : 1 अगस्त, 1948 (स्कूल रिकॉर्ड) ; भादों बदी दूज, 28 अगस्त, 1948 (मां के अनुसार) , रोहतक। 
शिक्षा : एम.बी.बी.एस. , एफ.सी.जी.पी. । 
कृतियां : अंग्रेजी, हिंदी, पंजाबी व हरियाणवी में कुल प्रकाशित 19, चार उपन्यास, चार कहानी-संग्रह, पांच कविता-संग्रह, एक दोहा सतसई, दो ग़ज़ल-संग्रह, एक लघुकथा, एक बालगीत, एक अंग्रेजी उपन्यास strongwomen@2ndheaven.com
संपादन : मसि-कागद (साहित्यिक त्रैमासिकी 11 वर्ष) । सम्मान : लोक साहित्य व लोक कला का सर्वोच्च सम्मान पं. लखमीचन्द सम्मान (हरियाणा साहित्य अकादमी) । विभिन्न अकादमियों द्वारा 5 पुस्तकें तथा हिंदी एवं पंजाबी की 10 कहानियां भी पुरस्कृत। राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न राज्यों की संस्थाओं द्वारा अनेक सम्मानों से अलंकृत ।
विशेष : एक उपन्यास कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के हिंदी एम.ए. फाइनल) के पाठ्यक्रम में।
रचना-कर्म पर पी-एच.डी. तथा 4 एम. फिल. शोध-कार्य संपन्न ।

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