Paani Kera Budbudaa

Susham Bedi

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  • Year: 2017

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-93-82114-28-4

‘यही कहानी थी पिया की? यह कथन है या सवाल? नहीं, कथन नहीं हो सकता। ऐसे खत्म नहीं हो सकती यह कहानी! ...शायद जिंदगी का सच यही है। कुछ भी नहीं है वहां पर हम बहुत कुछ भरकर उसी को सच मान बैठते हैं। ...पिया के मन में विरक्ति-सी हुई। सच क्या हस्ती है हमारी? कबीर के ही लफ्जों में पानी के बुलबुले जैसी!’ ये पंक्तियां ‘पानी केरा बुदबुदा’ उपन्यास का सारांश सरीखी हैं। सुप्रसिद्ध लेखिका सुषम बेदी का यह नवीनतम उपन्यास—जीवन, प्रेम, विवाह, सुख, विराग आदि शब्दों को समकालीन संदर्भ देते हुए लिखा गया है। उपन्यास विदेशी पृष्ठभूमि में लिखा गया है, लेकिन इसकी बेचैनियां सार्वदेशिक हैं।
पिया इस उपन्यास का केंद्रीय चरित्र है। उसका वैवाहिक जीवन, विवाह विच्छेद, तलाक के बाद प्रेम को फिर विवाह में बदलने की आकांक्षा, पुत्र और उसका पारिवारिक परिदृश्य—ऐसी अनेक बातों से मिलकर इस उपन्यास की कथावस्तु निर्मित हुई है। इस निर्मिति में निशांत, अनुराग, दामोदर, रोहन आदि बहुत दिलचस्प तरीके से शामिल हैं। पिया के लिए सेक्स कोई दुराग्रह नहीं है, पर वह ‘साथ’ चाहती है। विवाह इसीलिए उसे आश्वस्त और आकर्षित करता है। लेकिन नियति या मानव स्वभाव का निर्णय कुछ दूसरा है।
सुषम बेदी कथानक को गतिशील रखते हुए जीवन की मूलभूत चिंताओं पर बात करती हैं। स्वाभाविक रूप से स्त्री-विमर्श भी आता है। पिया के बारे में लेखिका का कथन है, ‘अनुराग ने उसके फूलों की गुलाबी रंगत ही देखी थी। पर वहां खून के थक्के भी जमे हुए थे।’ ऐसी जाने कितनी विडंबनाएं इस उपन्यास को स्त्री-जीवन का मार्मिक दस्तावेज बना देती हैं। सुषम बेदी का लंबा जीवनानुभव और जनमनोविज्ञान समझने का ढंग भाषा के अनूठे स्वरूप में व्यक्त हुआ है। बेहद पठनीय और विचारोत्तेजक उपन्यास। 

Susham Bedi

सुषम बेदी
जन्म: 1 जुलाई, 1945, फिरोज़पुर, पंजाब
शिक्षा: पीएच. डी. (पंजाब यूनिवर्सिटी)
कुछ वर्ष दिल्ली और पंजाब में अध्यापन
हिंदी की सभी प्रमुख पत्रिकाओं में कहानियों का प्रकाशन 
प्रमुख कृतियां: चिड़िया और चील, यादगारी कहानियां, तीसरी आंख (कहानी संग्रह); हवन, लौटना, इतर, कतरा दर कतरा, नवाभूम की प्रेमकथा, मोरचे, मैंने नाता तोड़ा, गाथा अमरबेल की (उपन्यास); हिंदी भाषा का भूमंडलीकरण (निबंध); शब्दों की खिड़कियां (कविता संग्रह)
विश्व की अनेक भाषाओं में पुस्तकें अनूदित 
दिल्ली दूरदर्शन और आकाशवाणी के लिए प्रचुर कार्य। अभिनय में गहरी रुचि 
1979 से न्यूयाॅर्क में निवास। 1985 से 2012 तक कोलंबिया विश्वविद्यालय, न्यूयाॅर्क में हिंदी भाषा और साहित्य का अध्यापन। हिंदी भाषा शिक्षण पर शोध जारी। हिंदी भाषा के मानकीकरण पर विशेष काम। ‘अमरीकी कौंसिल आॅन द टीचिंग आॅफ फाॅरेन लैंग्वेजेज़’ के लिए टेस्टर व ट्रेनर का कार्य। न्यूयाॅर्क यूनिवर्सिटी व सिटी यूनिवर्सिटी में विज़िटिंग प्रोफेसर
भारतीय साहित्य अकादमी, अक्षरम्, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, अभिव्यक्ति इंटरनेट द्वारा सम्मानित। भारत के राष्ट्रपति द्वारा ‘पद्मभूषण सत्यनारायण मोटूरि पुरस्कार’

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