Paheli

Meera Sikri

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  • Year: 2017

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Arya Prakashan Mandal

  • ISBN No: 978-93-84788-47-6

पहेली प्रसिद्ध  रचनाकार मीरा सीकरी का अत्यंत विचारोत्तेजक और रोचक उपन्यास है। लेखिका ने मनोविज्ञान की सूक्ष्मता के साथ स्त्राी-पुरुष संबंधों  को विश्लेषित किया है, फिर ये रिश्ते मां-बेटा, भाई-बहन, पति-पत्नी कैसे भी हों। जीत और वरयाम भाई-बहन हैं, उनके बीच कोई ऐसा ‘मेंटल ब्लाक’ है जिसके कारण उनकी जिंदगी की ‘आयरनी’ आकार लेती है। ...यही पहेली है जिसे मीरा सीकरी ने बेहद पठनीय कथा विन्यास में सुलझाया है। उपन्यास के खत्म होते-होते इसका एक जिंदादिल पात्रा आर. पी. कहता है, ‘...जिन भाई-बहन के असामान्य से दिखते संबंधें को न समझ पाने के कारण तुम इतना परेशान हो रही हो, ऐसे संबंधों  की विविध छायाएं, जैसे—लेस्बियन, गेयज पौराणिक काल से लेकर आज तक मिल जाएंगी। हमें उनकी उपेक्षा और अवज्ञा न कर उन्हें सहानुभूतिपूर्ण दृष्टि से समझने की कोशिश करनी चाहिए।’ ...कहना न होगा कि मीरा सीकरी ने पूरी सहानुभूति के साथ पात्रों को चित्रित किया है। कोई पात्र नकारात्मक नहीं लगता। सब मनःस्थिति और परिस्थिति के दायरों में सांस ले रहे हैं।
जाहिर है, उपन्यास में एक ‘मनोवैज्ञानिक तनाव’ व्याप्त है। इसके बावजूद रोचकता, उत्फुललता  और पठनीयता से भरपूर यह रचना एक ही बैठक में पढ़े जाने के लिए विवश करती है। जब जटिल को सरल या बोधम्य बनाना हो तो रचनाकार के पास सशक्त, बिंबधर्मी, पारदर्शी भाषा का होना जरूरी है। ‘अपरिपक्व उम्र की धुंधली स्मृतियों के अपूर्ण आभासों और अनुमान के आधर पर बीत गई (मृत कहने का मन नहीं होता उसका) जीत के व्यक्तित्व की गरिमा को खंडित करने का उसे कोई अधिकार नहीं।’ ...ऐसे अर्थपूर्ण विषय पर लिखने वाली लेखिका मीरा सीकरी ने इस उपन्यास में अंतर्मन के रहस्यों में विद्यमान ग्रंथियों को रेखांकित किया है।

Meera Sikri

मीरा सीकरी
जन्म : 2 जून, 1941 , गुजरां-वाला ( प. पाकिस्तान)
शिक्षा : दिल्ली विश्वविद्यालय के इंद्रप्रस्थ कॉलिज से 1962 में हिंदी साहित्य में एम. ए. और 1972 में 'नयी कहानी' शोधकार्य यर पी-एच. डी.
प्रकाशित रचनाएं : 'पैंतरे तथा अन्य कहानियां', 'अनकही', 'बलात्कार तथा अन्य कहानियाँ', 'प्रेम कहानियां' , 'मीरा सीकरी की यादगारी कहानियां', 'संकलित कहानियाँ', 'तप्त समाधि तथा अन्य कहानियां' (कहानी संकलन) ०  'गलती कहां?', 'अनुपस्थित' (उपन्यास) ० 'नयी कहानी' (आलोचना) ०  पैंतीस-चालीस कविताएं, कूछ समीक्षात्मक आलेख तथा संस्मण एवं यात्रा संस्मरण प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित
पुरस्कार-सामान : 'बलात्कार तथा अन्य कहानिया' हिंदी अकादमी दिल्ली द्वारा वर्ष 2002-03 के कृति सम्मान से सम्मानित, 'अनुपस्थित' अखिल भारतीय लेखिका मंच 'ऋचा' द्वारा वर्ष 2007-08 के लेखिका रत्न सम्मान से सम्मानित;

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