Bhartiya Thal Sena : Badhate Kadam

A. K. Gandhi

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  • Year: 2017

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Arya Prakashan Mandal

  • ISBN No: 978-93-84788-42-1

अनुशासन, देशप्रेम, स्वाभिमान, सेवा, उत्सर्ग और शौर्य का प्रतीक भारतीय सेना पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। धरती, आकाश और जल मार्गों पर किसी तपस्वी की भाँति एकाग्र भारतीय सेना की गौरवगाथा जितनी लिखी जाए उतनी कम है।
प्रस्तुत पुस्तक भारतीय थल सेना: बढ़ते कदम में ए. के. गाँधी ने इस अनूठे व अप्रतिम सैन्य संगठन के विविध पक्षों पर प्रामाणिक व रोचक ढंग से लिखा है। गाँधी स्वयं भारतीय वायु सेना में अपनी सेवाएँ दे चुके हैं, इसलिए उनके विवरण में तथ्यात्मकता और सूक्ष्मता है।
लेखक ने भारतीय थल सेना के महत्त्व को कई कोणों से विवेचित किया है। भारतीय थल सेना के गौरवपूर्ण इतिहास और उसकी उपलब्धियों  को पढ़ते हुए किसी भी भारतीय का मन गर्व से भर जाएगा। सरहद पर देश की रक्षा करने के साथ आवश्यकता होने पर देश के भीतर किसी भी प्रकार की सेवा या सहायता के लिए सेना तत्पर रहती है। राष्ट्रीय पर्वों और विभिन्न खेलों में इसका हुनर और हौसला रोमांचित कर देता है। असंभव को संभव बनाने की कला भारतीय सेना को आती है।
प्रस्तुत पुस्तक के अध्ययन से पाठक भारतीय थल सेना के प्रति अधिक आत्मीयता का अनुभव करेगा। भारत के सबसे बड़े रोजगार प्रदाताओं में से एक होने के कारण इसमें आजीविका के अवसर भी तलाशे जाते हैं। इस प्रयोजन से भी यह पुस्तक अत्यंत उपयोगी है, क्योंकि पुस्तक एक गौरवशाली संगठन में चयन की विधियों पर भी सम्यव्फ प्रकाश डालती है। 

A. K. Gandhi

ए. के. गांधी  भारतीय वायु सेना से सेवानिवृत्ति के पश्चात् पूर्णकालिक लेखक व अनुवादक के रूप में कार्यरत हैं। उनकी रुचि के विषय इतिहास, समाजशास्त्र व व्याकरण हैं। उन्होंने अनेक पुस्तकों का लेखन व अनुवाद किया है जो भारत के प्रतिष्ठित प्रकाशकों द्वारा छापी गई हैं, जिनमें सम्मिलित हैं—‘1857 क्रांति व क्रांतिध्रा’ (राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत); ‘प्रताप, शिवाजी व छत्रसाल-शौर्य व नीति की तुलना’ (म. प्र. हिंदी ग्रंथ अकादमी, भोपाल); 'The Second World War' (डायनेमिक प्रकाशन); 'Notable Essays And Letter’s' (रीडर्स च्वायस प्रकाशन) आदि। उनके द्वारा अनुवादित कुछ प्रमुख पुस्तकें हैं—‘कोमगता मरू’ (मलविंदर सिंह वडै़च, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत); ‘ज्योतिपुंज’ ;नरेन्द्र मोदी, प्रभात प्रकाशन) आदि। इसके अतिरिक्त उनके लेख विभिन्न समाचार-पत्रों, पत्रिकाओं में छपते रहते हैं।

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