Deshraag

Vishwanath Prasad Tiwari

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  • Year: 2017

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-93-81467-87-9

‘देशराग’ सुविज्ञ और सुप्रतिष्ठित कवि-आलोचक-संपादक विश्वनाथ प्रसाद तिवारी के अध्ययन व मनन को रेखांकित करती एक महत्त्वपूर्ण पुस्तक है। रचना के अपूर्व आयाम विकसित करने के साथ-साथ विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने ‘दस्तावेज़’ जैसी उल्लेखनीय साहित्यिक पत्रिका का संपादन करते हुए शब्द की संस्कृति को शिखर तक पहुंचाया है। यह पत्रिका संतुलित, सकारात्मक व संपन्न सामग्री के लिए तो प्रशंसित है ही, इसके संपादकीय प्रत्येक पाठक की अमूल्य धरोहर हैं। ‘देशराग’ में कुछ ऐसे ही विचारोत्तेजक संपादकीय संगृहीत हैं।
राजनीति, समाज और साहित्य के विविध पक्षों पर ‘दस्तावेज़’ के इन संपादकीयों में विचार किया गया है। लेखक के शब्दों में, इन टिप्पणियों में साहित्य, संस्कृति, भाषा, समाज और व्यक्तियों के प्रति जो कुछ भी व्यक्त हुआ है, वह गहरे देशराग के ही कारण। भारत का साधरण आदमी और उच्चतर मूल्य ही इन टिप्पणियों का पक्ष रहा है और उसे संकट में डालने वाला सब कुछ विपक्ष। भाव का जो अंश रचना में ढलने से रह गया, वही इस सीधे कथन के रूप में व्यक्त हुआ।
विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने इन लेखों के माध्यम से स्वस्थ विमर्श का उदाहरण प्रस्तुत किया है। वे ‘निर्णयात्मक’ होकर विचार नहीं करते। एक चिंतन प्रक्रिया चलती है, तर्क मुखर होते हैं, पक्ष-विपक्ष प्रकट होते हैं, व्यापक सामाजिक निहितार्थ खुलते हैं–तब कोई निर्णय उपलब्ध होता है। भाषा में वे सारे तत्त्व हैं जिनसे मिलकर ‘हिंदी जाति का तेजस्वी गद्य’ बनता है। 
देश और उसमें गूंजने वाली प्रशस्त सामाजिकता के राग को चीन्हने के लिए ‘देशराग’ बहुमूल्य पुस्तक है।

Vishwanath Prasad Tiwari

विश्वनाथ प्रसाद तिवारी
जन्म : 1940 ई०, कुशीनगर जनपद के एक गांव रायपुर भैंसही-भेडिहारी, (उ०प्र०) ।
पद : गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग से आचार्य एवं अध्यक्ष पद से 2001 ई० में अवकाश ग्रहण ।
प्रकाशित पुस्तकें : 'आधुनिक हिंदी कविता', 'समकालीन हिंदी कविता', 'रचना के सरोकार', 'कविता क्या है' , 'गद्य के प्रतिमान', 'आलोचना के हाशिए पर' (आलोचना); 'चीजों को देखकर', 'साथ चलते हुए', बिस्तर दुनिया के लिए', आखर अनंत', 'फिर भी कुछ रह जाएगा' (कविता-संस्मरण); 'आत्म की धरती', 'अंतहीन आकाश' (यात्रा-संस्मरण); 'एक नाव के यात्री' (लेखक के संस्मरण); 'मेरे साक्षात्कार' (साक्षात्कार)।
विदेश यात्राएँ : इंग्लैंड, मॉरिशस, रूस, नेपाल, अमेरिका, नीदरलैंड, जर्मनी, फ्रांस, लक्जमबर्ग, बेल्जियम, चीन, थाईलैंड ।
पुरस्कार : बिड़ला फाउंडेशन, दिल्ली द्वारा 2010 का 'व्यास' सम्मान, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा वर्ष 2007 में 'हिंदी गौरव' सम्मान, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा वर्ष 2000 में 'साहित्य भूषण' सम्मान, भारत मित्र संगठन, मास्को, रूस द्वारा बर्ष 2003 में 'पुश्किन' सम्मान, 'दस्तावेज' पत्रिका को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा वर्ष 1988 और 1995 में 'सरस्वती' सम्मान ।
संपादन : गोरखपुर से 'दस्तावेज' साहित्यिक त्रैमासिक पत्रिका का संपादन । यह पत्रिका रचना और आलोचना को विशिष्ट पत्रिका है, जो 1978 से अब तक नियमित निकल रही है ।
अनुवाद : अनेक देशी-विदेशी भाषाओं में रचनाओं के अनुवाद हुए हैं । रूसी, नेपाली, अंग्रेजी, मलयालम, पंजाबी, मराठी, बंगला, उर्दू आदि में भी रचनाएं अनूदित ।
संप्रति : उपाध्यक्ष, साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली ।

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