Itihaas Ka Vartamaan : Aaj Ke Bouddhik Sarokar-3

Bhagwan Singh

Availability: In stock

Seller: KGPBOOKS

Qty:
500.00 450 +


  • Year: 2017

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-81-933728-4-5

‘इतिहास का वर्तमान: आज के बौद्धिक सरोकार’ इस विमर्श-व्याकुल समय में तर्क, विवेक, परंपरा, निहितार्थ और रचनात्मक साहस सहेजकर लिखी गई एक अद्भुत पुस्तक है। इसके लेखक भगवान सिंह विभिन्न विधाओं में सक्रिय किंतु इतिहास-विवेचन में सर्वाधिक  ख्यातिप्राप्त सजग मनीषी हैं। उनकी इतिहास-दृष्टि स्पष्ट, प्रमाण पुष्ट और चिंतन संपन्न है। यही कारण है कि जब भगवान सिंह ‘तुमुल कोलाहल समय’ व ‘स्वार्थसिद्ध वाग्युद्ध’ को परखने के लिए विचारों में प्रवेश करते हैं तो चिंतन की एक अलग रूपरेखा तैयार होने लगती है। स्वयं लेखक ने कहा है–
"मैंने चर्चाओं को शीर्षक तो दिए हैं, परंतु उन विषयों का सम्यव्फ निर्वाह नहीं हुआ है। बातचीत करते हुए आप किसी विषय से बँधकर नहीं रह पाते। बात आरंभ जहाँ से भी हुई हो बीच में कोई संदर्भ, दृष्टांत, प्रसंग आते ही विषय बदल जाता है और आप भूल जाते हैं बात कहाँ से आरंभ हुई थी। याद भी आई तो आप कई बार स्वयं पूछते हैं, ‘हाँ तो मैं क्या कह रहा था?’ गरज कि सुनने वाले को आप क्या कह रहे हैं इसका हिसाब भी रखना चाहिए! परंतु सबसे मार्मिक प्रसंग तो उन विचलनों में ही आते हैं, तभी तो अपना दबाव डालकर वे धरा को ही बदल देते हैं ।"

Bhagwan Singh

भगवान सिंह
जन्म: 1 जुलाई, 1931, गगहा, गोरखपुर, किसान परिवार।
शिक्षा: एम.ए. हिंदी, गोरखपुर।
कृतियां: काले उजले पीले, 1964 (उपन्यास) ०  अपने समानान्तर, 1970 (कविता-संग्रह) ०  महाभिषग, 1973 (उपन्यास) ०  आर्य-द्रविड़ भाषाओं की मूलभूत एकता, 1973 (भाषाशास्त्रा) ०  हड़प्पा सभ्यता और वैदिक साहित्य, 1987 (इतिहास) ०  अपने अपने राम, 1992 (उपन्यास) ०  उपनिषदों की कहानियां 1993 ०  पंचतंत्र की कहानियां 1995 (पुनर्लेखन) ०  परमगति, 1997 (उपन्यास) ०  उन्माद 1999 (उपन्यास) ०  शुभ्रा, 2000 (उपन्यास) ०  द वेदिक हड़प्पन्स, 1995 (इतिहास) ०  इंद्रधनुष के रंग, 1996 (आलोचना) ०  भारत: तब से अब तक, 1996 (इतिहास) ०  भारतीय परंपरा, 2011 ०  प्राचीन भारत के इतिहासकार, 2011 ०  कोसंबी: कल्पना से यथार्थ तक (2012)।
गतिविधि: अध्ययन-लेखन। मौलिक इतिहास चिंतन में विशिष्ट नाम।
सम्मान: हिंदी अकादमी का पहला पुरस्कार 1986-87 में ‘हड़प्पा सभ्यता और वैदिक साहित्य’ पर तथा दूसरा पुरस्कार 1999-2000 में ‘उन्माद’ पर।

Scroll