Chune Huye Nibandh (Paperback)

Hazari Prasad Dwivedi

Availability: In stock

Seller: KGPBOOKS

Qty:
60 + Free Shipping


  • Year: 2014

  • Binding: Paperback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-81-7016-358-9

चुने हुए निबंध 
'चुने हुए निबंध' हज़ारीप्रसाद द्विवेदी के निबंधों का अद्वितीय संग्रह है। इस संग्रह में द्विवेदी जी के सभी प्रकार के निबंधों को संकलित किया गया है। इस संकलन में शोधपरक निबंध, ललित निबंध दोनों ही हैं। विशेषकर द्विवेदी जी के निबंधकार रूप का एक समग्र चित्र यह संकलन प्रस्तुत करता है। 
संकलन  में सम्मिलित निबंध इस प्रकार हैं :
अशोक के फूल / कुटज / देवदारु / आम फिर बौरा गए ! / नाख़ून क्यों बढ़ते हैं ? / मेरा कांचनार / ठाकुर जी की बटोर / व्योमकेश शाश्त्री उर्फ़ हज़ारीप्रसाद द्विवेदी / मेरी जन्मभूमि / घर जोड़ने की माया / हिमालय [1 ] / अंधकार से जूझना है /  भाषा, साहित्य और देश / मनुष्य ही साहित्य का लक्ष्य है / साहित्य की संप्रेषणीयता / क्या निराश हुआ जाय / कबीर के मूल वचन / भीष्म को क्षमा नहीं किया गया ! / रामचरितमानस / बरसो भी ।

Hazari Prasad Dwivedi

हजारीप्रसाद द्विवेदी  
जन्म : श्रावण शुक्ल एकादशी संवत् 1964-19 अगस्त 1907 ई. ।  जन्मस्थान : आरत दुबे का छपरा, ओझवलिया, बलिया, उ. प्र. । 8 नवंबर, 1930 को हिंदी शिक्षक के रूप में शांतिनिकेतन में कार्यारंभ 1950 ई. में काशी हिंदू विश्व विद्यालय के हिंदी विभाग में प्रोफेसर एवं अध्यक्ष नियुक्त।  1957 ई. में राष्ट्रपति हारा 'पद्मभूषण' स्वे सम्मानित काशी नागरी प्रचारिणी सभा के अध्यक्ष 1952-53। 1955 ई. में प्रथम राजभाषा आयोग के राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्य । हिंदी साहित्य के प्रतिष्ठित एवं सर्वमान्य हस्ताक्षर । हिंदी साहित्य के गतिशील विकास परंपरा में समीक्षा, इतिहास, निबंध, उपन्यास, कविता के सृजन द्वारा नई दिशा दी। इनका रचना संसार बहुत विशाल है। लोक-विमुख धर्म, दर्शन, कला-संस्कृति, इतिहास साहित्य उनके लिए महत्वहीन हैं। मृत्यु के बाद भी अनेक अप्रकाशित एवं आकलित रचनाएं प्रकाशित ।

स्मृति शेष : 19 मई 1979 ई. को दिल्ली में देहावसान ।

Scroll