Doosara Gazal Shatak (Paperback)

Sher Jung Garg

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  • Year: 2014

  • Binding: Paperback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-81-7016-739-6

दूसरा ग़ज़ल  शतक
इस श्रृंखला की शुरुआत 'हिन्दी गजल शतक' से हुई थी । दुष्यन्त, बलबीर सिंह रंग, चिरंजीत, रामावतार लागी, सूर्यभानु गुल, बालस्वरूप राही, शलभ श्रीराम सिंह, मृदुता अरुण आदि-आदि पच्चीस उल्लेखनीय गज़लकारों की ग़ज़लें इस संकलन में समाविष्ट की गई थीं। इस बार शिवबहादुर सिंह भदौरिया, ओमप्रकाश चतुर्वेदी 'पराग' से लेकर युवा ज्योति शेखर और हरिओम तक 'दूसरा ग़ज़ल शतक' में आए है । कवयित्रियों में रंजना अग्रवाल, सरोज व्यास और विनीता गुप्ता है; लोकप्रिय गीतकारों में कुँअर बेचैन, उर्मिलेश, श्रवण राही हैँ । मानव, उपेन्द्र कुमार, कमलेश भट्ट 'कमल', कमल किशोर भावुक, प्रभात शंकर, योगेन्द्र दत्त शर्मा और लक्ष्मण आदि है । तात्पर्य यह कि 'दूसरा ग़ज़ल शतक में ग़ज़ल से जुडे विभिन्न मूडों, मान्यताओं, संवेदनाओं, सरोकारों, शिल्पों, कथ्यों वाले रचनाकारों का यह संगम हिंदी में लिखी जा रही ग़ज़लों का एक गुलदस्ता है ।

Sher Jung Garg

शेरजंग गर्ग
जन्म: 29 मई, 1937, देहरादून (उत्तराखंड)
शिक्षा: एम० ए०, पी-एच० डी० । पिछले लगभग पैंतालीस वर्षों से पत्रकारिता, साहित्यिक लेखन, प्रसारण, प्रबंधन एवं प्रशासन के विविध क्षेत्रों में कार्य । 
प्रकाशित कृतियाँ: ‘चंद ताज़ा गुलाब तेरे नाम’, ‘क्या हो गया कबीरों को’ (कविताएँ), ‘स्वातंत्रयोत्तर हिंदी कविता में व्यंग्य’, ‘व्यंग्य के मूलभूत प्रश्न’ (आलोचना), ‘बाज़ार से गुज़रा हूँ’, ‘दौरा अंतर्यामी का’ (व्यंग्य), ‘सुमन बाल गीत’, ‘अक्षर गीत’, ‘नटखट गीत’, ‘गुलाबों की बस्ती’, ‘शरारत का मौसम’, ‘पक्षी उड़ते फुर-फुर’, ‘पशु चलते हैं धरती पर’, ‘गीतों के इंद्रधनुष’, ‘गीतों के रसगुल्ले’, ‘यदि पेड़ों पर उगते पैसे’, ‘गीतों की आँखमिचैली’, ‘नटखट पप्पू का संसार’ (श्री ब्रह्मदेव के साथ), ‘भालू की हड़ताल’, ‘सिंग बर्ड सिंग’ (बाल-साहित्य), ‘चहक भी ज़रूरी: महक भी ज़रूरी’ (सुश्री प्रभाकिरण जैन के साथ), ‘ग़ज़लें ही ग़ज़लें’, ‘नया ज़माना नई ग़ज़लें’, ‘मुक्तक एवं रुबाइयाँ’, ‘ग़ज़लें रंगारंग’, ‘कवियों की शायरी’, ‘बीरबल ही बीरबल’ (संपादित), ‘हिंदी कार्यकुशलता’, गोपाल कृष्ण कौल द्वारा संपादित ‘ग़ज़ल सप्तक’ में एक कवि। लोकप्रिय गीतकारों, यथा दुष्यंत कुमार, गोपालदास नीरज, वीरेंद्र मिश्र, गिरिजा कुमार माथुर आदि के संकलनों एवं ‘हिंदी ग़ज़ल शतक’ शृंखला का संपादन।
 हिंदी अकादमी, दिल्ली द्वारा साहित्यकार सम्मान एवं श्रेष्ठ बाल-साहित्य के लिए दो बार पुरस्क्रित। प्रथम 'गोपालप्रसाद व्यास व्यंग्यश्री पुरस्कार' से सम्मानित । 
'काका हाथरसी हास्य रत्न सम्मान' से अलनक्रित। 
पूर्व निदेशक, हिंदी भवन, नई दिल्ली ।

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