Kartavya (Paperback)

Samual Smiles

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  • Year: 2011

  • Binding: Paperback

  • Publisher: Parmeshwari Prakashan

  • ISBN No: 978-93-80048-22-2

कर्तव्य
चौबीस वर्ष पूर्व मैंने ‘आत्मनिर्भरता’ (Self Help)  पुस्तक लिखी थी। तीन वर्ष उपरांत सन् 1853 में वह प्रकाशित हुई। वह पुस्तक संयोग से ही लिखी गई थी। मैंने ‘लीडस’ स्थान पर नवयुवकों के सम्मुख कुछ भाषण दिए थे। उन भाषणों में मैंने इस बात पर जोर दिया था कि उनके जीवन की प्रसन्नता व सफलता मुख्यतः उनके निरंतर आत्मसंस्कार, अनुशासन, संयम और सबसे अधिक ईमानदारी व साहस सेकर्तव्यपालन करने पर निर्भर करती है। मेरे इन भाषणों का आशा से अधिक प्रभाव हुआ।
अपने व्यवसाय से अवकाश मिलने के बाद सायंकाल का समय मैं अपनी पुस्तक के लेखन में लगाता था। पुस्तक जब पूरी हो गई, तो मैंने उसे लंदन के एक प्रकाशक के पास भेजा। क्रीमिया के युद्ध के कारण उन दिनों पुस्तकें प्रायः बहुत कम बिकती थीं। इसलिए प्रकाशक ने धन्यवाद सहित मेरी पुस्तक लौटा दी। ‘जार्ज स्टीफेंसन का जीवन-चरित्र’ छपने के बाद ही श्री मूरे की कृपा से ‘आत्मनिर्भरता’ प्रकाशित हो सकी। 
इसके तेरह वर्ष पश्चात् मेरी पुस्तक ‘चरित्र’ प्रकाशित हुई। इस पुस्तक में मैंने महापुरुषों के चरित्रों को चित्रित करने का प्रयत्न किया, क्योंकि नवयुवकों को संस्कार देने का यह सर्वोत्तम ढंग है। इसके पाँच वर्ष बाद मेरी पुस्तक ‘बचत’ (Thrift) प्रकाशित हुई। इसमें मैंने श्रम के महत्त्व और बचत के लाभों पर जोर दिया था। 
इनके पाँच वर्ष उपरांत इसी क्रम की अंतिम पुस्तक ‘कर्तव्य’ प्रकाशित हो रही है। मुझे आशा है कि पिछली पुस्तकों की तरह यह भी पाठकों एवं बुद्धिजीवियों को आकर्षित करेगी। इस पुस्तक में मैंने सर्वोत्तम और साहसी स्त्री-पुरुषों के उदाहरण दिए हैं। महापुरुषों के जीवन हमें यह शिक्षा देते हैं कि हम भी उन्हीं की तरह कार्य कर सकते हैं। जो व्यक्ति कर्तव्य की उच्च अवस्था को प्राप्त कर लेता है, वह महान् बन जाता है।   
—सैमुअल स्माइल्स

Samual Smiles

सैमुअल स्माइल्स
प्रसिद्ध स्काटिश लेखक, पत्रकार एवं समाज सुधारक सैमुअल स्माइल्स ने अपनी लेखनी के माध्यम से ब्रिटेन के युवकों में कर्तव्यों के प्रति जागरूकता पैदा करने का सराहनीय कार्य किया था। अपनी पहली पुस्तक ‘सैल्फ हेल्प’ ने सैमुअल स्माइल्स को विश्व में ख्याति प्रदान की। सैमुअल स्माइल्स ने जीवन में निरंतर सुधार की सदैव पैरवी की। वर्ष 1880 में स्माइल्स ने इसी क्रम में ‘ड्यूटी’ पुस्तक की रचना की। यह पुस्तक महान् व्यक्तियों के जीवन के प्रेरक प्रसंगों को अत्यंत रोचक ढंग से प्रस्तुत करती है। इस पुस्तक में सैमुअल ने उन महान् पुरुषों के जीवन का वर्णन किया है, जिनके जीवन से हम प्रेरणा प्राप्त कर सकते हैं। सैमुअल मानते हैं, जो व्यक्ति कर्तव्य की उच्च अवस्था को प्राप्त कर लेता है वह महान् बन जाता है। सैमुअल के विचार आज भी हमारे समाज के लिए प्रासंगिक हैं। इस पुस्तक का हिंदी अनुवाद ‘कर्तव्य’ के रूप में किया गया है ताकि देश की युवा पीढ़ी सैमुअल के प्रेरक प्रसंगों से प्रेरणा प्राप्त कर जीवन को सफल बना सके।

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