Kavi Ne Kaha : Ekant Shrivastava (Paperback)

Ekant Shrivastva

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  • Year: 2016

  • Binding: Paperback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-93-85054-56-3

एकान्त वस्तुतः छत्तीसगढ़ की ‘कन्हार’ के कवि हैं। एकान्त का काव्य-संसार एक ओर माँ-बाप, भाई-बहन का भरा-पूरा परिवार है तो दूसरी ओर अंधी लड़की, अपाहिज और बधिर जैसे असहाय लोगों का शरण्य भी और ‘कन्हार’ जैसी लंबी कविता तो एक तरह से नख-दर्पण में आज के भारत का छाया-चित्र ही है। ‘अन्न हैं मेरे शब्द’ से अपनी काव्य-यात्रा आरंभ करने वाले एकान्त उन थोड़े से कवियों में हैं जो ‘शब्द’ को अपनी कविताओं से एक नया अर्थ दे रहे हैं। निश्चय ही एकान्त का काव्य एक लंबी छलाँग है और ऊँची उड़ान भी--कवि के ही शब्दों में एक भयानक शून्य की भरपाई। ---नामवर सिंह
काली मिट्टी से कपास की तरह उगने की आकांक्षा से उद्वेलित यह कवि अपनी हर अगली कविता में मानो पाठक को आश्वस्त करता है कि वह अपने भाव-लोक में चाहे जितनी भी दूर चला जाए, अंततः लौटकर वहीं आएगा जो उसके अनुभव की तपी हुई काली मिट्टी है। यह एक ऐसी दुनिया है जो एक किसानी परिवेश के चमकते हुए बिंबों और स्मृतियों से भरी है। एक अच्छी बात यह कि गहरे अर्थ में पर्यावरण-सजग इस कवि के पास एक ऐसी देखती-सुनती, छूती और चखती हुई भाषा है, जो पाठक की संवेदना से सीध संलाप करती है।   ---केदारनाथ सिंह
एकान्त की कविता और कवि-कर्म की खूबी है कि उन्होंने अपने को औपनिवेशिक आधुनिकता के पश्चिमी कुप्रभाव से बचाया है। यही कारण है कि उनकी कविता कलावादी और रूपवादी प्रभाव से मुक्त है। ऐसा इसलिए कि एकान्त अपने जनपद, अपनी जड़ों और अपनी ज़मीन को कभी नहीं छोड़ते। उनकी कविता हमें भारतीय समृद्ध काव्य-परंपरा की याद दिलाती है जो आज की अधिकांश कविता से विलुप्तप्राय है। एकान्त, निराला, नागार्जुन, त्रिलोचन और केदारनाथ अग्रवाल की परंपरा के सशक्त कवि हैं। एकान्त की कविता में कोई ठहराव नहीं है। वे आज भी नित नवीन और सारगर्भित कविताएँ बिना किसी विचलन या दोहराव के रच रहे हैं। क्योंकि उनका गहरा रिश्ता भारतीय लोक और जनमानस से बना हुआ है। सही अर्थों में वे लोकधर्मी कवि हैं। ‘नागकेसर का देश यह’ हिंदी में एकान्त की सर्वाधिक लंबी कविता है जिसके कई अर्थ-ध्वनिस्तर हैं और बड़ी संश्लिष्टता है।      ---विजेन्द्र

Ekant Shrivastva

एकान्त श्रीवास्तव
जन्म: 8 फरवरी, 1964, जिला रायपुर (छत्तीसगढ़) का एक कस्बा छुरा।
शिक्षा: एम.ए. (हिंदी), एम.एड., पी-एच.डी.
प्रकाशित  कृतियां: ‘अन्न हैं मेरे शब्द’ (1994), ‘मिट्टी से कहूंगा धन्यवाद’ (2000), ‘बीज से फूल तक’ (2003) (कविता-संग्रह) ०  ‘कविता का आत्मपक्ष’ (2006) (निबंध) ०  ‘शेल्टर फ्राम दि रेन’ (2007) (अंग्रेजी में अनूदित कविताएं) ०  ‘मेरे दिन मेरे वर्ष’ (2009) (स्मृति कथा) ०  ‘नागकेसर का देश यह’ (2009) (लंबी कविता) तथा ‘बढ़ई, कुम्हार और कवि’ (2013) (आलोचना)।
पुरस्कार: शरद बिल्लौरे, रामविलास शर्मा, ठाकुर प्रसाद, दुष्यंत कुमार, केदार, नरेन्द्र देव वर्मा, सूत्र, हेमंत स्मृति, जगत ज्योति स्मृति, वर्तमान साहित्य-मलखान सिंह सिसौदिया कविता पुरस्कार।
अनुवाद: कविताएं अंग्रेज़ी व कुछ भारतीय भाषाओं में अनूदित। लोर्का, नाज़िम हिकमत और कुछ दक्षिण अफ्रीकी कवियों की कविताओं का अंग्रेज़ी से हिंदी अनुवाद।
संपादन: नवंबर, 2006 से दिसंबर, 2008 तक तथा जनवरी, 2011 से पुनः ‘वागर्थ’ का संपादन।

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