Kavi Ne Kaha : Kunwar Narain (Paperback)

Kunwar Narayan

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  • Year: 2014

  • Binding: Paperback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-93-83233-38-0

शीर्षस्थ कवि कुँवर नारायण की कुछ कविताओं का यह संचयन उनके विस्तृत काव्य-बोध को समझने में सहायक होगा। पिछले पचास-साठ वर्षों में होने वाली महत्त्वपूर्ण गतिविधियों की सूक्ष्म एवं संवेदनशील अभिव्यक्ति इन कविताओं में प्रतिबिंबित हुई है। इस संग्रह में किसी विभाजन के अंतर्गत कविताएँ नहीं चुनी गई हैं, कोशिश है कि ‘आत्मजयी’ एवं ‘वाजश्रवा के बहाने’ को छोड़कर बाकी सभी कविता-संग्रहों में से कुछ कविताएँ रहें।
समय और स्थान की निरंतरता का बोध कराती उनकी कविताएँ दूर समयों, जगहों और लोगों के बीच हमें ले जाती हैं। कुँवर नारायण की कविताएँ लंबी और जटिल भारतीय अस्मिता को बहुत कुशलता से आधुनिकता के साथ जोड़कर दोनों को एक नई पहचान देती हैं। उनकी रचनाशीलता में हिंदी भाषा तथा विभिन्न विषय नई तरह सक्रिय दिखाई देते हैं। एक ओर जहाँ वह पारंपरिक भाषा में नई ऊर्जा डालते हैं वहीं बिलकुल आज की भाषा में एक बहुत बड़े विश्वबोध् को संप्रेषित करते हैं-कविता के लिए ज्यादा से ज्यादा जगह बनाते हुए। प्रस्तुत कविताओं का संकलन पाठकों को कई तरह से संतोष देगा।

Kunwar Narayan

कवि कुँवर नारायण की कविताओं को देश-विदेश में विशेष मान्यता प्राप्त हो चुकी है। कुँवर नारायण कविताओं के साथ-साथ लगातार विभिन्न साहित्यिक, वैचारिक एवं सांस्कृतिक विषयों पर महत्त्वपूर्ण लेखन कर रहे हैं। उनको ज्ञानपीठ पुरस्कार, पद्मभूषण, साहित्य अकादमी की महत्तर सदस्यता आदि के अतिरिक्त कई देश-विदेश के पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।

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