Kavi Ne Kaha : Uday Prakash_120 (Paperback)

Uday Prakash

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  • Year: 2014

  • Binding: Paperback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-81-89859-84-8

कवि ने कहा : उदय प्रकाश
सादगी उदय प्रकाश की कविताओं की जान है जो हर उस आदमी से तुरंत रिश्ता कायम कर लेती है जो सामाजिक अन्याय और शोषण की मार उन लोगों के बीच बैठा सह रहा है, जिनके पास आंदोलन और नारे नहीं हैं, सिर्फ खाली अकेले न होने का अहसास भर है... । . . .ये कविताएँ पाठक की संवेदना में बहुत कुछ ऐसा तोड़फोड़ कर जाती हैं, जिनके सहारे वह फिर कुछ नया रचने की ज़रूरत महसूस करने लगता है । किसी भी यातना को कवि बिना उस यातना से मानसिक रुप से गुज़रे हुए प्रेषित नहीं कर सकता । उदय प्रकाश की कविताएँ काफी कुछ इसकी दुर्लभ मिसाल है । -सर्वेश्वरदयाल सक्सेना 
कविताओं में उदय प्रकाश की एक और कलात्मक विशेषता गौरतलब है । वे एक ओर वर्तमान के अलग-अलग संदर्भों और  स्थितियों को लेते हैं, पृथक और विच्छिन्न दुनियाओं को साथ-साथ रख देते हैं, ये पिघलकर एक इकाई बन जाते हैं । इनके 'फ्यूजन' से एक समग्र समय बनता है हम इन पृथक और विभिन्न दिखते संदर्भों और स्थितियों के भीतर की तारतम्यता तक पहुंचते हैं। यहीं कविता का अभीष्ट है। कुछ कविताओं में उदय प्रकाश ने बीज से वृक्ष बनने तक की पूरी प्रक्रिया को उलट दिया है । जैसे कोई विपरीत दिशा में चलती फ़िल्म हो । यह एक रचनाकार का नियति के क्रम में हस्तक्षेप है । -विजय कुमार 
क्यों ऐसा नहीं हुआ कि उदय प्रकाश की कविताओं में छिपे उनके कथाकार और उनकी कहानियों में छिपी कविता पर सतर्क पाठको का ध्यान जाता और मूल्यांकन की कोई और नई समावेशी पद्धति जन्म लेती ! जिस जादुई यथार्थवाद के लिए …. उदय प्रकाश की कहानियों अनेकार्थी जान पड़ती हैं और एक से अधिक पाठ के लिए पाठकों को उत्युक बनाती हैं उससे मिलती-जुलती अपरिचयीकरण (डिफेमिलियराइजेशन) सरीखी काव्ययुक्ति का इस्तेमाल करके ही उनकी कविताएँ अधिक सार्थक बन सकी हैं । -परमानंद श्रीवास्तव

Uday Prakash

उदय प्रकाश
जन्म : 1952, मध्य प्रदेश के शहडोल (अब अनूपपुर) जिले के गाँव सीतापुर में ।
शिक्षा : सागर वि०वि०, सागर और जवाहरलाल नेहरू वि०वि०, नई दिल्ली में ।
कृतियाँ : 'सुनो कारीगर', 'अबूतर-कबूतर', 'रात में हारमोनियम', 'एक भाषा हुआ करती है" (कविता/संग्रह) । 'दरियाई घोड़ा', 'तिरिछी', 'और अंत से प्रार्थना', 'पॉल गोमरा का स्कूटर', 'पीली छतरी वाली लड़की', 'दत्तात्रेय के दु:ख', 'मोहन दास', 'अरेबा परेबा', 'मैंगोसिल' (कहानी-संग्रह) । 'ईश्वर की आँख', 'अपनी उनकी बात' और 'नई सदी का पंचतंत्र' (निबंध, आलोचना, साक्षात्कारों का संकलन) ।
अनुवाद : 'लाल बास पर नीले घोड़े', (मिखाइल शात्रोव के  नाटक का अनुवाद और रूपांतर), 'कला अनुभव' (प्रो० हरियन्ना की सौंदर्यशास्त्री पुस्तक का अनुवाद), 'इंदिरा गांधी की आखिरी लड़ाई', (बी०बी०सी० संवाददाता मार्क टली-सतीश जैकब की किताब का हिंदी अनुवाद), 'रोम्या रोला का भारत' (आंशिक अनुवाद और संपादन) ।
पुरस्कार : भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार (1980), ओमप्रकाश साहित्य सम्मान (1982), श्रीकांत वर्मा स्मृति पुरस्कार (1992), मुक्तिबोध पुरस्कार (1996), साहित्यकार सम्मान, हिंदी अकादमी, दिल्ली, (1999), रामकृष्ण जयदयाल सद्भावना सम्मान, (1997), पहल सम्मान (2003), कथाक्रम सम्मान (2005), पुश्किन  सम्मान (2006), द्विजदेव सम्मान (2006-07), वनमाली सामान (2008) ।

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