Mannu Bhandari Ka Rachnatmak Avdaan (Paperback)

Mannu Bhandari

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  • Year: 2012

  • Binding: Paperback

  • Publisher: Vandana Book Agency

  • ISBN No: 978-81-89424-34-3

मन्नू भंडारी का रचनात्मक अवदान
मन्नू भंडारी हिंदी की एक जानी-मानी, सुविख्यात, बहुपठित, पाठकों और समीक्षकों में समान रूप से लोकप्रिय, अनेक देशी-विदेशी भाषाओं में एक से आदर- सम्मान के साथ पढ़ी जाने वाली रचनाकार हैं, पर एक बेहद सामान्य स्त्री के रूप में देखें तो भी उनका जीवन एक अदम्य जीवट और जिजीविषा की अद्भुत मिसाल है। अपने को हमेशा कम करके आँकना मन्नू जी के स्वभाव में है। आम पाठक उनके नाम से आतंकित होकर उनसे मिलने आते हैं और सरलता, सहजता तथा स्नेह से सराबोर होकर लौटते हैं। हिंदी साहित्य की प्रख्यात लेखिका वे बाद में हैं, पहले एक परम स्नेही, पारदर्शी व्यक्तित्व हैं जो पहली ही मुलाकात में आपको बनावट और दिखावट से परे अपने आत्मीय घेरे में ले लेती हैं।
मन्नू भंडारी ने परिमाण में बहुत ज्यादा नहीं लिखा पर जो लिखा, उसमें जिंदगी का यथार्थ इतनी सहजता, आत्मीयता और बारीकी से झलकता है कि वह हर 
पाठक को भीतर तक छू लेता है। हाल ही में गोवा विश्वविद्यालय में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में ‘मन्नू भंडारी का रचनात्मक अवदान’ पर एक पूरा पेपर रखा गया है। पूरे एक दिन के सेमिनार में प्राध्यापकों के साथ-साथ छात्र-छात्राओं यानी उनके पाठकों ने भी जिस उत्साह और स्फूर्ति का परिचय दिया, वह आज भी मन्नू जी को हिंदी साहित्य के एक बहुत बड़े वर्ग का चहेता रचनाकार साबित करता है।
मन्नू जी के दो उपन्यास--‘आपका बंटी’ और ‘महाभोज’ हिंदी साहित्य में दो मील के पत्थर हैं--जो अपने समय से आगे की कहानी कहते हैं और हर समय का सच होने के कारण कालातीत भी हैं। 
‘आपका बंटी’ जहाँ भारतीय परिवार के एक औरत के द्वंद्व और एक बच्चे की त्रासदी की कथा है, ‘महाभोज’ उससे बिलकुल अलग हटकर राजनीतिक हथकंडों में पिसते और मोहरा बनते दलित वर्ग और भ्रष्ट व्यवस्था की कहानी है। 

Mannu Bhandari

मन्नू भंडारी जन्म : 3 अप्रैल, 1931 जन्म-स्थान : भानपुरा (मध्यप्रदेश) शिक्षा : एम० ए० (अजमेर) हिन्दी-पारिभाषिक कोश के आदि निर्माता श्रीसुख सम्यतराय भंडारी की सबसे छोटी पुत्री मन्नू भंडारी को लेखन-संस्कार पैतृकदाय के रूप में प्राप्त । रचनाएं कारबी-संग्रह : एक प्लेट सैलाब, मैं हार गई, तीन निगाहों की एक तस्वीर, यही सच है, दस प्रतिनिधि कहानियां, श्रेष्ठ कहानियां, प्रिय कहानियां, त्रिशंकु उपन्यास : एक इंच मुस्कान (राजेन्द्र यादव के साथ), आपका बंटी..., महाभोज, स्वामी नाटक : बिना दीवारों के घर, महारभोग किशोरोपयोगी : कलश (उपन्यास), आँखों देखा झूठ (कहानियां), आस माता मन्नू भंडारी की संपूर्ण कहानियह प्रकाशनाधीन 'रजनीगंधा', 'स्वामी', 'जीना यहाँ' फिल्में, 'रजनी', 'दर्पण', 'निर्मला' टी०वी० सीरियल ।

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