Raakshas (Paperback)

Shanker Shesh

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  • Year: 2011

  • Binding: Paperback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-81-7016-578-1

राक्षस
राक्षस एक जातिवाचक शब्द ही नहीं, मानसिकता द्योतक शब्द भी है। राक्षस वह है, जो सामान्य मानवीय स्वरूप के विरोध में रहता है ।
इस नाटक में शंकर शेष ने मनुष्य की इसी वृत्ति को उभारा है । यहाँ रणछोड़दास, सुकालू और दुकालू ऐसे चरित्र हैं जो मनुष्य के भीतर छिपे प्रेम और द्वेष के संघर्ष को तीव्र करते है और फिर इस निर्णय पर पहुंचते हैं कि–
अब नहीं रुकेगा कमल फूल
अब नहीं गिरेगी
आने वाले कल की आँखों में धूल
अब गाँव हमारा नहीं रहेगा
जड़ पत्थर की नाँव 
राक्षस अपनी पूरी अमानवीय स्थिति के साथ हमें इस आशा की स्थिति तक एहुंचाता है ।
शकर शेष द्वारा लिखा गया एक सशक्त नाटक ।

Shanker Shesh

शंकर शेष
2 अक्तूबर, 1933, बिलासपुर (म.प्र.) में जन्म
नागपुर विश्वविद्यालय से 1956 में बी.ए. ऑनर्स (प्रथम श्रेणी) 
1960 में पी-एच.डी.
बंबई विश्वविद्यालय से 1976 में एम.ए. लिंग्विस्टिक (प्रथम श्रेणी)
वर्ष 1956 से जीवनपर्यंत रंगमंच से संबद्ध
मध्य प्रदेश शासन द्वारा ‘बाढ़ का पानी: चंदन के द्वीप’ और 
‘बंधन अपने-अपने’ कृतियां पुरस्कृत 
फिल्म ‘दूरियां’ के लिए ‘फिल्मफेयर पुरस्कार’ प्राप्त
फिल्म ‘घरौंदा’ तथा ‘दूरियां’ के लिए ‘आशीर्वाद पुरस्कार’ प्राप्त
साहित्य कला परिषद, दिल्ली द्वारा ‘कोमल गांधर’ पुरस्कृत
28 अक्तूबर, 1981 को श्रीनगर (कश्मीर) में निधन।

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