Sant Malook Granthawali

Baldev Vanshi

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  • Year: 2003

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788188121106

संत मलूक ग्रंथावली
संतों की दुनिया सहज, सरल, चैतन्य और प्रकाश की दुनिया है । ढोंग, दिखावा, छल, छद्म और मिट्टी की दुनिया के विपरीत उन्होंने मानवीय, संवेदनशील, जीवंत दुनिया के निर्माण में अपनी सारी सामर्थ्य  लगा दी है । कबीर, रैदास, नानक, दादू की भाँति संत मलूकदास भी आजीवन इसी पथ पर बढते रहे । मानवीयता, अध्यात्म, हिन्दू-मुस्लिम एकात्मता एवं जाति-पांती के विरुद्ध संदेश देते रहे ।
जब हर श्वास स्वयं ही रामकाज में लग जाए, अजपा जाप चलने लगे, इसके बाद ऐसी स्थिति आती है—आराध्य और आराधक एकमेक हो जाएं । व्यक्ति मनुष्य से देवता बन जाता है । व्यक्ति-त्वांतरण हो जाता हे। मलूकदास ने यह स्थिति सहज ही उपलब्ध कर ली । अब राम उनका जप या सुमिरन कर रहे है :
माला जपों न कर जपों, जिभ्या कहों न राम । 
सुमिरन मेरा हरि करै, मैं पायो विस्राम॥ 
मनुष्य की प्राकृतिक ऊर्जा, अंतर्निहित परमात्म- शक्ति-इनकी प्राप्ति से भौतिक जीवन का सुधार, यहीं महालक्ष्य है मलूक की वाणी का । यानी मानव के जीवन को सर्वांगरूप से अनुभूत्तिपूर्ण बनाना और सुधारना । एक बेहतर मानवीयता को धरती पर सुलभ बनाना ।

Baldev Vanshi

डॉ० बलदेव वंशी
जन्म : 1 जून, 1938, मुलतान (अब पाकिस्तान में)
एम०ए० हिंदी, पी-एच०डी० । हिंदी के सुप्रतिष्ठित कवि, आलोचक, पत्रकार और संपादक । ग्यारह कविता-संग्रह, पाँच आलोचना पुस्तकें सहित पैंतीस से ऊपर पुस्तके प्रकाशित । विभिन्न भाषा अकादमियों, साहित्यिक संस्थाओं, विश्वविद्यालयों द्वारा सम्मानित । छ: पुस्तकें केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा पुरस्कृत । 'कहत कबीर कबीर' पर 'कबीर शिखर सम्मान' प्राप्त । संत मलूकदास की मूल वाणी को देवनागरी में लाने के उपलक्ष्य में प्रथम श्री मलूक रत्न पुरस्कार (1999) । रचनाएँ विश्वविद्यालय पाठयक्रमों में निर्धारित क्या अनेक भाषाओं में अनूदित ।
'विश्व रामायण सम्मलेन' क्तथा कबीर चेतना यात्रा' के सिलसिले में मॉरीशस, हालैंड, इंग्लैंड, बैल्जियम, नेपाल आदि विदेशों में और देश में यात्राएँ । 'अखिल भारतीय भाषा संरक्षण संगठन' के संस्थापक अध्यक्ष, विश्व कबीरपंथी महासभा के अध्यक्ष, दादू शिखर सम्मान  समिति के संयोज़क-निदेशक ।
'कहत कबीर', 'दादू जीवन दर्शन', 'संत कवि  दादू', ‘श्री मलूक वाणी' (मूल रूप में प्रथमत: प्रकाश्य) पुस्तकों के लेखक-संपादक ।

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