Hindi Ki Pratinidhi Kahaniyan Taatvik Vivechan

Jayanti Prasad Nautiyal

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  • Year: 2009

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Arya Prakashan Mandal

  • ISBN No: 978-81-88118-98-4

कहानी साहित्य पर अनुशीलन, साहित्य की अन्य विधाओं की अपेक्षा कम ही हुआ है । कहानी साहित्य जहाँ एक ओर भारत के सभी विश्वविद्यालयों में पढ़ाया जाता है  वहीं दूसरी ओर कहानी  पाठक वर्ग बहुत विस्तीर्ण है, परंतु इतने विराट और व्यापक साहित्य पर आलोचना, समालोचना तथा तात्त्विक विवेचनपरक साहित्य बहुत कम मात्रा में उपलब्ध है । 
इस पुस्तक में कथा तत्त्वों का विश्लेषण, शब्दार्थ एवं टिप्पणी खंड तथा व्याख्या खंड आदि का अनुशीलन उत्तर, दक्षिण, पूरब और पश्चिम के बोर्डों, विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों को ध्यान में रखकर किया गया है । 
संक्षेप में कहें तो कह सकते हैं कि यह पुस्तक सम्पूर्ण भारत में विश्वविद्यालयों, बोर्डों, महाविद्यालयों आदि के प्राध्यापकों तथा विद्यार्थियों के लिए तो उपयोगी है ही, साथ ही यह पुस्तक शोधार्थियों, कथा साहित्य के गंभीर अध्येताओं, समालोचकों, समीक्षकों के लिए भी उपादेय सिद्ध होगी ।  इस पुस्तक को इस प्रकार लिखा गया है कि यदि सामान्य पाठक भी इसे पढ़ना चाहे तो उसे हिंदी कथा साहित्य की पर्याप्त जानकारी प्राप्त हो ।

Jayanti Prasad Nautiyal

डॉ० जयन्ती प्रसाद नौटियाल
जन्म : 3 मार्च, 1956, देहरादून, उत्तरांचल राज्य ।
शिक्षा : एम०ए० हिन्दी (स्वर्णपदक प्राप्त) , पी-एच०डी० ( तुलनात्मक भाषा विज्ञान ) दी. लिट्। ( हिन्दी साहित्य ), एम०ए० ( अंग्रेजी) ,एल०एल०बी० ,एम०बी०ए० (बैंकिंग एवं वित्त) , सी०ए०आई०आई०बी०, डी०बी०एम० ( आई०आई०बी०एफ० ), डिप्लोमा (अनुवाद) ,साहित्य- रत्न, आई०जी०डी० (कला डिप्लोमा), सी०पी०डी०, कंप्यूटर विज्ञान पर डिप्लोमा सहित कुल 35 डिग्री/ डिप्लोमा/अन्य प्रशिक्षण प्रमाणपत्र ।
सेवा : पत्रकारिता, सम्पादन, अध्यापन, चित्रकार, रीडर, जन संपर्क, शाखा परिचालन, एसोसिएट फैकल्टी के रूप में विभिन्न पदों पर भारत सरकार एवं कॉर्पोरेशन बैंक में सेवाएँ दीं। संप्रति सहायक महाप्रबंधक के रूप में राजभाषा प्रभाग, कॉर्पोरेशन बैंक, प्रधान कार्यालय, मंगलूर- 575001 में कार्यरत ।
लेखन : बीस पुस्तकें प्रकाशित ० उन्तीस पुस्तकें संयुक्त रूप से अनूदित ०  एक हजार से अधिक लेख विभिन्न पत्रिकाओँ में प्रकाशित ०  दस से अधिक पत्रिकाओं के अनेक अंको का सम्पादन। 
पुरस्कार : साहित्य एवं समाज-सेवा में योगदान के लिए अब तक चौंतीस पुरस्कार/सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।

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