Hindi Sahitya : Sarokaar Aur Saakshaatkaar

Dr. Arsu

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  • Year: 2004

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Parmeshwari Prakashan

  • ISBN No: 978-81-88121-46-5

हिंदी साहित्य : सरोकार और साक्षात्कार
हिंदी मात्र हिंदीभाषी क्षेत्र की ही नहीं, बल्कि इस विशाल समूचे देश की भाषा बन चुकी है और उसे यह स्थान दिलाने में अनुवाद के आदान-प्रदान के साथ हिंदीतर क्षेत्र के साहित्यकारों द्वारा हिंदी को अपनाए जाने से संभव हुआ है। हिंदीतर क्षेत्र के अनेक साहित्यकार अपने क्षेत्र के भाषायी साहित्य के साथ हिंदी साहित्य और उसके सरोकारों से गंभीरतापूर्वक जुड़े हुए हैं। डॉ. आरसु हिंदीतर भाषी क्षेत्र के मूर्धन्य साहित्यकार है । वह कालिकट विश्वविद्यालय से हिंदी विभाग के प्राध्यापक है, साथ ही सृजनशील साहित्यकार तथा मर्मग्राही समीक्षक हैं।

केरल के मलयालमभाषी डॉ० आरसु की यह पुस्तक 'हिंदी साहित्य : सरोकार और साक्षात्कार' इस तथ्य को भली भाँति प्रमाणित करती है कि हिंदी साहित्य की प्रवृतियों और प्रणेताओं पर उनकी निरीक्षण और विश्लेषणपरक वृष्टि कितनी गहरी है । आठवें दशक के हिंदी साहित्य की धाराओं के बारे में सृजन संवाद इस कृति की अनूठी विशेषता है । विदेशो से रहकर निष्ठापूर्वक हिंदी की श्रीवृद्धि करने वाले लेखकों व अनुवादकों के साथ डॉ० आरसु के आंतरिक संवाद, जो वैश्चिक स्तर पर हिंदी के विकास का द्योतक है, को भी इससे कुशालता के साथ रेखांकित किया गया है ।

Dr. Arsu

डॉ० आरसु 
(कलमी नाम : आरसु)
जन्म : 1950, कालिकट 
मातृभाषा : मलयालम 
शिक्षा : हिंदी में एम० ए० पी-एच० डी० कालिकट विश्वविद्यालय से। पत्रकारिता और अनुवाद से डिप्लोमा ।
शेष विषय : स्वातंत्र्योत्तर हिंदी उपन्यास पर विदेशी संस्कृति और चिंतन का प्रभाव ।
अध्यापन : 1977 से 1984 तक गवर्नमेंट कॉलेज, कालिकट में 1985 से कालिकट विश्वविद्यालय में, 2008-2010 में आचार्य और अध्यक्ष, 2011 में सेवानिवृत्त ।
कृतियों : हिंदी और मलयालम में तीस कृतियाँ प्रकाशित ।
प्रमुख हिंदी कृतियाँ : 'स्वातंत्र्योत्तर हिंदी उपन्यास', ‘साहित्यानुवाद : संवाद और संवेदना', 'मलयालम साहित्य : परख और पहचान', 'अनुवाद : अनुभव और अवदान', 'हिंदी  साहित्य : सरोकार और साक्षात्कार', 'भारतीय भाषाओं के पुरस्कृत साहित्यकार', 'मलयालम के महान कथाकार', 'भारतीय साहित्य और आस्था' ।
पुरस्कार-प्रशस्तियां : ओइस्का इंटरनेशनल, जापान का पुरस्कार (1993), भारत सरकार का पुरस्कार (1997), बिहार सरकार का पुरस्कार (2003), उत्तर भारत की 10 साहित्यिक संस्थाओं के पुरस्कार, हरिवंश राय बच्वन पत्रकारिता पुरस्कार । सौहार्द सम्मान (उ० प्र०) (2009), केरल हिंदी साहित्य अकादमी पुरस्कार (2010)।
अतिधि संपादक : अनुवाद मधुमति, सद्भावना दर्पण, अंतरंग, छत्तीसगढ़ टुडे, युगस्पंदन, वर्तमान जनगाथा, नवनिकप के मलयालम विशेषांकों के अतिधि संपादक ।
विशेष व्याख्यान : जापान के तीन विश्वविद्यालयों में भारतीय साहित्य पर व्याख्यान (2002), उत्तर भारत के प्रमुख विश्वविद्यालयों में अनुवाद, भारतीय साहित्य और साहित्यिक  पत्रकारिता पर व्याख्यान ।

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