Lekhak Ki Chherchhar

Kashi Nath Singh

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  • Year: 2013

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-93-83233-14-4

लेखक की छेड़छाड़ 
आलोचना की भाषा और रचना की भाषा एक नहीं हो सकती–इस मानने वाले लोग हैं लेकिन काशीनाथ सिंह ऐसे लेखक हैं जिनका प्रबल विश्वास है कि आलोचना भी रचना है । 'लेखक की छेड़छाड़' में उनके इस विश्वास के आधार देखे जा सकते हैं । काशीनाथ सिंह के मूल स्वभाव यहाँ भी देखा जा सकता है–बतकही, चुहल और मजे-मजे में जमाने भर की बात कह देना । वे अपने साथ चलने वाले समकालीनों के काम पर नजर डालते हैं तो अग्रजों को अघर्य  भी देते हैं । उनके अपने कहानी लेखन के अंतरसूत्रों को जानना हो या अभी-अभी के नए कथा परिदृश्य का सिंघावलोकन, यहाँ सब मौजूद है । 'अपना मोर्चा' और 'कशी एक अस्सी' जैसे कालजयी उपन्यासों की रचना-प्रक्रिया में केवल शोधार्थियों की ही दिलचस्पी नहीं हो सकती और न ही लेखक की सामाजिक भूमिका पर बहस पर किन्हीं ख़ास पाठकों की। यह एक अनुपम गद्य सर्जक के ही बुते की बात है कि वह धूमिल जैसे कवि पर आलेख लिखता है तो गोदान का नए जमाने में महत्त्व भी खोज पाता है । यहां भी काशीनाथ सिंह की पहले दर्जे की गद्य सर्जन का आस्वाद लिया जा सकता  है जो आलोचना, लेख, मूल्यांकन, समीक्षा या स्मृति लेख के रूप में आए हैं । यह लेखक की छेड़छाड़ तो है लेकिन इस छेड़छाड़ की व्यंजन गहरी है और मार दूर तक जाने वाली है । 

Kashi Nath Singh

काशीनाथ सिंह जन्म : बनारस जिले के जीयनपुर जाय में 1 जनवरी, 1937 । शिक्षा : आरंभिक शिक्षा गाँव के पास के विद्यालयों में । काशी हिंदू विश्वविद्यालय से हिंदी में एम.ए. ('59) और पी-एच. डी. ('63) । काशी हिंदू विश्वविद्यालय में 'हिंदी भाषा का ऐतिहासिक व्याकरण' कार्यालय में शोध-सहायक ('62-'64) । '65 से वहीं के हिंदी विभाग में प्राध्यापक, फिर प्रोफेसर एवं अध्यक्ष पद से '97 में सेवा मुक्त । प्यारी कहानी 'संकट' कृति पत्रिका (सितंबर, 1960) में प्रकाशित । प्रकाशित जूतियाँ : लोग बिस्तरों पर, सुबह का डर, आदमीनामाँ, नई तारीख, सदी का सबसे बड़ा आदमी, कल की फटेहाल कहानियां, प्रतिनिधि कहानियां, दस प्रतिनिधि कहानियां, कहनी उपखान, (कहानी-संग्रह) घोआस (नाटक); हिंदी में संयुक्त क्रियाएं (शोध); आलोचना भी रचना है (समीक्षा); अपना मोर्चा, काशी का अस्सी, रेहन पर रंग्घू (उपन्यासा); याद हो कि न याद हो, आछे दिन पाछे गए, घर का जोगी जोगड़ा (संस्मरण); काशी के नाम (नामवर के पत्र)। अपना मोर्चा का जापानी एवं कोरियाई भाषाओं से अनुवाद । जापानी में कहानियों का अनुमित संग्रह। कई कहानियों के भारतीय और अन्य विदेशी भाषाओं में अनुवाद । उपन्यास और कहानियों की रंग-प्रस्तुतियाँ । 'तीसरी दुनिया' के 'लेखकों-संस्कृति-कर्मियों के सम्मेलन' के सिलसिले में जापान-बयात्रा (नवंबर, ‘81 ) । सम्मान : कथा सम्मान, समुच्चय सम्मान, शरद जोशी सम्मान, प्ताहित्य भूषण सम्मान, साहित्य अकादेमी पुरस्कार। संप्रति : बनारस में रहकर स्वतंत्र लेखन ।

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