Raastrakavi Maithili Sharan Gupta Aur Saaket

Prof. Surya Prasad Dixit

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  • Year: 2011

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-81-89859-19-0

राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त और साकेत 
राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त का काव्य परिमाण तथा स्तर, दोनों दृष्टियों से महत् है और अद्यावधि प्रासंगिक भी । गुप्त जी ने पारंपरिक वस्तु-शिल्प का नवीकरण किया, ख़डीबोली को काव्योपम बनाया, पुराख्यानों को आधुनिकता-बोध से जोड़ा और कविता को जन-संवाद की दिशा में मोडा । उन्होंने वाचिक परंपरा का पुनरारंभ करके स्वातंत्र्य-समर की कालावधि में एक विशिष्ट कोटि का जन-प्रबोधन किया । उनका जैसा विशद रचना-संसार किसी अन्य आधुनिक कवि का नहीं है ।
'साकेत' गुप्त जी की सर्वोच्च सिद्धि है। उसके समतुल्य प्रबंधपदुता, कथ्य-कौशल और भाव-संपदा बहुत कम महाकाव्यों में प्राप्य है ।
'साकेत' पर अनेक समीक्षाएं प्रकाशित हुई है, किन्तु उसके मूल प्रतिपाद्य को अब तक परखा-पहचाना नहीँ जा सका था । इस ग्रंथ के प्रणेता प्रो० दीक्षित की स्थापना है कि यह एक अंचल विशेष (साकेत) को नायक-पद पर प्रतिष्ठित कर रचा गया महाकाव्य है, जिसे आंचलिक प्रबंध की संज्ञा दी जा सकती है । 'साकेत' एक ओर रामोपासकों का दिव्या धाम है और दूसरी ओर राष्ट्रीय सांस्कृतिक चेतना, पुरातत्त्व एवं उच्च उदात्त भारतीय आदर्शों से अभिमपिडत पुण्यभूमि भी, अत: वैष्णव भक्त, साथ ही राष्ट्रकवि गुप्त जी की पूर्ण तदात्म परिणति इसमें फलित हुई है ।
यह समीक्षा जितनी मौलिक है, उतनी ही परीक्षोपयोगी भी। इसे अपने जीवनकाल में स्वयं राष्ट्रकवि ने भावविभोर होकर सराहा था । वस्तुत: सूक्ष्म, सुविचारित, संयत कृति समीक्षा है यह ।

Prof. Surya Prasad Dixit

प्रो० सूर्यप्रसाद दीक्षित
प्रोफेसर व पूर्व अध्यक्ष, हिंदी विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय
जन्म: 6 जुलाई, 1938, बन्नावाँ, रायबरेली (उत्तर प्रदेश)
संस्थापक अध्यक्ष: पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग, लखनऊ  विश्वविद्यालय
शोध: छायावादी गद्य (पी-एच० डी०) ०  व्यावहारिक सौंदर्य-शास्त्र (डी० लिट्०)
निर्देशन: हिंदी तथा पत्रकारिता में लगभग 65 पी-एच० डी०, डी० लिट्० 
प्रकाशन: 54 शोध-समीक्षा ग्रंथ एवं लगभग 450 लेख
संपादन: उत्कर्ष, उद्भव, अवधी, ज्ञानशिखा, कुलसंदेश, चाणक्यविचार, साहित्यभारती, संचारश्री आदि।
स्नेहोपहार: उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान से ‘साहित्य भूषण’ सम्मान ०  हिंदी साहित्य सम्मेलन से ‘साहित्य वाचस्पति’ की उपाधि ०  इंटरनेशनल सेंटर कैंब्रिज से ‘इंटरनेशनल मैन ऑफ़ दी इयर’ (1998 से 2003 तक) ०  अमेरिकन इंस्टीट्यूट से ‘डिसटिंगिस्ड परसनालिटी ऑफ़ दी वल्र्ड’
संबंधित संस्थाएँ: पूर्व अध्यक्ष, भारतीय हिंदी परिषद्, प्रयाग ०  अध्यक्ष, पब्लिक रिलेशंस सोसाइटी ऑफ़ इंडिया, लखनऊ ०  अध्यक्ष, बिहारी पुरस्कार, बिरला फाउंडेशन, नई दिल्ली ०  मंत्री, हिंदी साहित्य सम्मेलन, इलाहाबाद
स्फुट: हिंदी की प्रायः सभी महत्त्वपूर्ण संस्थाओं से संबद्ध  ० देश के 30 विश्वविद्यालयों की पाठ्य समिति, शोध समिति में विशेषज्ञ ०  लगभग 500 सेमिनारों, रेडियो, टी० वी०  में सहभागिता ०  10 देशों का भ्रमण। इन्हीं सेवाओं पर ‘दीक्षागुरु’ (अभिनंदन ग्रंथ), ‘साहित्य- मनीषी’ (समीक्षा) प्रकाशित तथा कई शोध ग्रंथ प्रस्तुत। ‘प्रयोजनमूलक हिंदी’ विषय के पुरस्कर्ता।

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