Man Ki Baat

Acharya Janki Vallabh Shastri

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  • Year: 2012

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-93-82114-13-0

मन की बात आचार्य जानकीवल्लभ शास्त्री के निबंधों का संग्रह है, जिसे उन्होंने सहज भाव से ‘ललित निबंध’ कहा है। यद्यपि आलोचनात्मक एवं वैयक्तिक निबंधों के इस संग्रह में कई भाव-भूमियाँ हैं। शास्त्री जी अपने निबंधों में विधा की बंदिशों को स्वीकार नहीं करते, जिसकी अपेक्षा पेशेवर निबंध लेखकों से की जाती है। वैदुष्य और लालित्य के  रचनात्मक बिंदु पर खड़े उनके निबंधों का अपना रंग है। यह एक कवि का गद्य तो है ही, एक ऐसे साहित्य मनीषी की मनोभूमि का ललित विस्तार भी है, जो अपना उदाहरण स्वयं है।
–गोपेश्वर सिंह

Acharya Janki Vallabh Shastri

आचार्य जानकीवल्लभ शास्त्री का जन्म गया (बिहार) जिला के मैगरा नामक गाँव में (माघ शुक्ल द्वितीया) 1916 ई. में तथा निधन 7 अप्रैल, 2011 को मुजफ्फरपुर (बिहार) में हुआ। 
संस्कृत में ‘काकली’ नामक काव्य-संग्रह के साथ साहित्य जगत् में प्रवेश करने वाले शास्त्री जी निराला की प्रेरणा से हिंदी में आए। संस्कृत साहित्य और भारतीय वांगमय के प्रखर और प्रकांड विद्वान् शास्त्री जी ने हिंदी कविता और गद्य में तीन दर्जन से ऊपर पुस्तकें लिखीं। ‘रूप अरूप’, ‘तीर तरंग’, ‘अवंतिका’, ‘शिप्रा’, ‘मेघगीत’, ‘उत्पलदल’, ‘संगम’, ‘राधा’ (महाकाव्य) आदि उनकी प्रसिद्ध काव्य-पुस्तकें हैं। कविता के अतिरिक्त आलोचना, संस्मरण, उपन्यास, कहानी, गीतिनाट्य आदि विधाओं में भी शास्त्री जी की दर्जन-भर से ऊपर पुस्तकें हैं। ‘कालिदास’ उनका प्रसिद्ध उपन्यास है, जो अपनी तरह का हिंदी का अकेला उपन्यास है। ‘हंसबलाका’ उनके लिखे संस्मरणों की ऐसी पुस्तक है, जिसकी दूसरी मिसाल हिंदी में शायद ही मिले। ‘राजेन्द्र शिखर सम्मान’ तथा ‘भारत भारती’ आदि सम्मानों से सम्मानित शास्त्री जी छायावादोत्तर युग के ऐसे विलक्षण कवि-लेखक थे, जिनका साहित्य उस युग में प्रचलित ‘वादों’ के लिए चुनौती है।


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