Khushboo Udhaar Le Aye

Upendra Kumar

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  • Year: 1998

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788170164111

खुशबू उधार ले आए
उपेन्द्र कुमार की ग़ज़लों का 'हिन्दीपन' एक ओर 'उर्दू' की फारसीयत से अलगाता है तो दूसरी ओर गजल के व्यापक भारतीय परिप्रेक्ष्य को सबल बनाता है, जिसका अनुकरण पाकिस्तान के ग़ज़लकार भी करते है । डॉ० शेरजंग गर्ग ने ठीक ही कहा है कि उपेन्द्र की कहन में वैविध्य है जो उन्हें बहुत-से ग़ज़लकारों से सर्वथा अलग का देता है । 
-डॉ० गंगाप्रसाद विमल
हबीब जालिब की तरह उपेन्द्र कुमार भी व्यवस्था से लड़ते और कारावास में डाले गए इंसान की वेदना को शिद्दत से महसूस करते है :
वो कैदी चुप था लेकिन गुनगुनाया
बजी जंजीर की जब इक कड़ी थी
उपेन्द्र के पास शे'र कहने का सलीका भी है और कल्पना को इस्तेमाल करने का फन भी । 
-ज्ञानप्रकाश विवेक
उपेन्द्र के पास शायद किसी चालाक अनुभवी कवि का शिल्प-कौशल नहीँ है, यह अच्छी बात है अन्यथा उनकी रचनाओं में कथ्य की प्रमुखता नहीं रह पाती । अनगढ़ यथार्थ का विशाल भंडार परोसती उपेन्द्र कुमार की ग़ज़लें पाठकों को अपने आसपास को सतर्कता से देखने को मजबूर करेंगी, ऐसा विश्वास है ।
- विजय किशोर मानव
न तो उपेन्द्र जी उर्दू ग़ज़ल की रिवायतों की रौ में बहे है और ना ही उन्होंने अपनी ग़ज़लों पर हिन्दी का ‘कवितापन हावी होने दिया है । उनकी ग़ज़लों की बुनावट और उनकी प्रकृति गीतों से अलग है । इसीलिए उनमें गजलियत की मौजूदगी का अहसास बना रहता है । सोजो-साज़ (वेदना और संगीतात्मकता) हूँ तो कविता मात्र के आधार तत्त्व माने जाते है, मगर इनके बरौर तो ग़ज़ल का काम ही नहीं चल सकता । ग़ज़ल में रोमानिया की चाशनी भी ज़रूरी है । उपेन्द्र जी ने ग़ज़ल की इन खूबियों को न केवल समझा है, बल्कि इनसे अपनी ग़ज़लों को बखूबी सँवारा भी है ।
- बालस्वरूप राही

Upendra Kumar

उपेन्द्र कुमार 
 जन्म : सितंबर, 1947, बक्सर (बिहार)
शिक्षा : स्नातक इंजीनियरिंग, स्नातक विधि
देश-विदेश की विभिन्न प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं में कहानियाँ, कविताएँ, गजल, निबंध, समीक्षा आदि प्रकाशित होते रहे है । आकाशवाणी और दूरदर्शन द्वारा कविताओं के प्रसारण के साथ-साथ ग़ज़लों की प्रतिष्ठित गायनों द्वारा संगीतमय प्रस्तुति का प्रसारण भी । बी०बी०सी० द्वारा कविताओं का प्रसारण
प्रकाशन : बूढी जडों का नवजात जंगल (कविता-संग्रह), अपना घर नहीं आया (ग़ज़ल-संग्रह), मैं बोल पड़ना चाहता हूँ (लंबी कविता), चुप नहीं है समय (कविता-संग्रह), प्रतीक्षा में पहाड़
सस्मान : काव्य-रचना समान : महर्षि गंधर्व वेद विश्व विद्यापीठ ० साहित्यिक क्षेत्र में योगदान के लिए नेशनल प्रेस इंडिया द्वारा सम्मानित्त ० साहित्यिक कृति समान : हिन्दी अकादमी, दिल्ली

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