Hindi Shikshan : Sankalpana Aur Prayog

Hiralal Bachhotia

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  • Year: 2012

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Arya Prakashan Mandal

  • ISBN No: 978-81-88118-04-5

हिंदी शिक्षण: संकल्पना और प्रयोग
प्रायः हिंदी भाषा और हिंदी की साहित्यिक शैली को एक माना जाता रहा है। इसमें भेद कर तदनुसार शिक्षण की आवश्यकता के संदर्भ में साहित्येतर अभिव्यक्तियों और शैलियों के सक्षम प्रयोग की निपुणता प्राप्त करना अपेक्षित है। इस दृष्टि से ‘हिंदी-शिक्षण: संकलपना और प्रयोग’ में विधियों आदि की अवधारणा के साथ उसके प्रायोगिक रूपों को प्रस्तुत करने की चेष्टा की गई है। प्रारंभिक स्तर पर विशेष रूप से हिंदीतर भाषी शिक्षार्थी के लिए शैक्षिक-भाषायी कार्यकलापों (भूमिका-निर्वाह आदि) के माध्यम से भिन्न-भिन्न संदर्भों में बोलने का अभ्यास, कैसे पढ़ाएं के अंतर्गत परिवेश निर्माण, वाचन, कथ्य या विषयवस्तु का विश्लेषण, रूपांतरण, स्थानात्ति, बोध प्रश्न आदि पर विचार तथा उनके अभ्यासपरक उदाहरणों के माध्यम से अध्यापन हेतु विविध आयाम प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। 

Hiralal Bachhotia

हीरालाल बाछोतिया
प्रकाशित कृतियाँ :- अभी भी, जनहित और अन्य कविताएं, (कविता); विद्रोहिणी शबरी (मिथक काव्य); एक और मीनाक्षी, कस्तूरी गंध, नेकी की राह, आँगन का पेड़, फल हमारा है (उपन्यास); नहीं रुकती है नदी, भारत से बाहर भारत (यात्रा-यायावरी); हिंदी शिक्षण : संकल्पना और प्रयोग, राजभाषा हिंदी और उसका विकास, प्रौढ शिक्षा : संकल्पना और प्रयोग, हिदीं भाषा : प्रकृति, प्रयोग और शिक्षण (भाषा; भाषिकी); निराला साहित्य का अनुशीलन, आकाशधर्मी आचार्य : पं. हजारीप्रसाद द्विवेदी (प्र. हिंदी अकादमी, दिल्ली); हिंदी की अन्य गद्य विधाएँ (प्र. हिंदी अकादमी, दिल्ली), सतपुडा के स्वर, अस्मिता (काव्य-संकलन), अनुस्वा (साहित्यिक त्रैमासिकी) (संपादन) ।

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