Amritlal Nagar Ki Babuji-Betaji And Compny

Achla Nagar

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  • Year: 2009

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9789380146218

अमृतलाल नागर की बाबूजी-बेटाजी एंड कंपनी
‘निकाह’, ‘आख़ीर क्यों’, ‘बागबान’ और ‘बाबुल’ समेत कोई तीन दर्जन हिट फ़िल्मों व दो दर्जन धारावाहिकों की पटकथा तथा संवाद लेखिका एवं कथाकार साहित्य भूषण डॉ०  अचला नागर द्वारा बीसवीं शताब्दी के मूर्धन्य भारतीय उपन्यासकार और अपने पिता अमृतलाल नागर के संबंध में लिखे संस्मरणों की अनुपम कृति है---‘बाबूजी-बेटाजी एंड कंपनी’। इसमें उन्होंने पिता के संग जिए विविध काल-खंडों को अत्यंत सजीवता से उकेरा है।
कथाकार, नाटककार, नाट्य-निर्देशक, मंच एवं रेडियो की प्रतिभाशाली अभिनेत्री अचला नागर विगत लगभग 30 वर्षों से बालीवुड से तो जुड़ी हैं ही, कदाचित् वह फ़िल्म-उद्योग की इनी-गिनी लेखिकाओं में हैं, जिन्होंने क़द्दावर पुरुषों द्वारा संचालित फ़िल्मोद्योग के दुर्ग को भेदकर वहाँ ‘निकाह’ के ज़रिए न केवल अपनी धमाकेदार उपस्थिति दर्ज़ कराई है वरन् साल दर साल क़ायम अपने सम्मानजनक स्थान को बरक़रार भी किए हुए हैं।
ये संस्मरण शिल्प की दृष्टि से लीक से हटकर हैं। दरअसल ऐसा लगता है, मानो ये संस्मरण न होकर किसी फ़िल्म के ‘रश प्रिंट’ (रशेज़) हों। ज़ाहिर है, एक कुशल पटकथाकार होने के नाते इन संस्मरणों में उनकी क़लम कैमरे की आँख की तरह चली है; लिखने के बजाय उन्होंने सुंदर वृत्तचित्र शूट किए हैं। कहीं विहंगम दृश्य को अपना कैमरा ‘पैन’ करते हुए वे ‘लांग शॉट’ से ‘मिड शॉट’ और ‘क्लोज़अप’ में अंकित करती चली आती हैं, कहीं ‘मोन्ताज’ का प्रयोग करती हैं तो कहीं कुशलतापूर्वक ‘मिक्स’ और ‘डिज़ाल्व’ भी कर देती हैं। बतरस से पगी यह पुस्तक पाठक को आरंभ से अंत तक बाँधकर एक साँस में पढ़ जाने को विवश करती है।

Achla Nagar

अचला नागर
जन्म-तिथि: 2 दिसंबर  ०   जन्म-स्थान: लखनऊ (उ.प्र.)
शिक्षा: बी.एस-सी. , एम.ए., पी-एच.डी. (हिंदी साहित्य)
साहित्य: आठ वर्ष की अवस्था में प्रथम कहानी बाल पत्रिका ‘लल्ला’ में छपी। कालेज के दिनों में कथा, लेख, रेखाचित्रों आदि का आगरा कालेज पत्रिका, ‘अमर उजाला’ (आगरा) में प्रकाशन। 1970 से प्रायः नियमित कथा-लेखन। ‘नीहारिका’, ‘साप्ताहिक हिंदुस्तान’, ‘धर्मयुग’, ‘सारिका’, ‘कादंबिनी’ आदि प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में कहानियाँ प्रकाशित। दो कहानी-संग्रह ‘नायक-खलनायक’ एवं ‘बोल मेरी मछली’ प्रकाशित।
फ़िल्म-धारावाहिक: विगत 25 वर्षों से फ़िल्मोद्योग में कथा, पटकथा एवं संवाद लेखिका के रूप में ख्यातिपूर्वक प्रतिष्ठित। विगत दो दशकों में दूरदर्शन के लिए लगभग दो दर्जन धारा- वाहिकों का लेखन, जिनमें ‘कशमकश’, ‘दादी माँ’, ‘अष्ट- भुजी’, ‘तीन देवियाँ’, ‘गृहलक्ष्मी का जिन्न’, ‘सूरदास’, ‘संबंध’, ‘काग़ज़ की कश्ती’, ‘पीढ़ियाँ’, ‘देवरानी-जेठानी’ प्रमुख हैं।
विशिष्ट पुरस्कार-सम्मान: साहित्य: उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा कहानी-संग्रह ‘नायक-खलनायक’ पर ‘यशपाल अनुशंसा सम्मान’ (1987) तथा श्रेष्ठ साहित्य एवं फ़िल्म सेवाओं के लिए ‘साहित्य भूषण सम्मान’ (2003), हिंदी-उर्दू साहित्य अवार्ड कमेटी का ‘साहित्य शिरोमणि सम्मान’ (2008)। 
टेलीविज़न: ‘ओनीडा पुरस्कार’ धारावाहिक ‘संबंध’ के लिए। फ़िल्म: ‘निकाह’ के लिए ‘फ़िल्म फेयर’ अवार्ड (1982), फ़िल्म जर्नलिस्ट एसोसिएशन उ.प्र. अवार्ड (1982) एवं ‘जेसीज़ मुंबई’ अवार्ड। ‘आशीर्वाद सम्मान’ (‘आख़ीर क्यों ?’), ‘बलराज साहनी नेशनल अवार्ड’, ‘सलाम बाम्बे अवार्ड’ (‘गीत’) तथा ‘नामी रिपोर्टर सम्मान’ (‘बाबुल’)। 
अन्य विशिष्ट सम्मान: ‘मदर्स अचीवर्स अवार्ड’ (ई.टी.वी. चैनल) (2005), ‘म्यूज़ आफ़ म्यूजे़ज़’ (2007) (संगीतांजलि मुंबई--महिला अंतर्राष्ट्रीय दिवस), ‘स्वास्तिक सम्मान’ (1985) एवं ‘ब्रज विभूति’ (2006)।

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