Kashmir : Raat Ke Baad

Kamleshwar

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  • Year: 2014

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788170162483

कश्मीर : रात के बाद
हिंदी के सुप्रसिद्ध कथाकार कमलेश्वर का कश्मीर से बहुत गहरा लगाव था । 'कश्मीर : रात के बाद' में लेखक के इस गहरे कश्मीरी लगाव को शिद्दत से महसूस किया जा सकता है । एक गल्पकार की नक्काशी, एक पत्रकार की निर्भीकता, एक चेतस इतिहास-द्रष्टा की पैनी नज़र तथा इन सबके मूल में जन सामान्य से प्रतिश्रुत मानवीय सरोकारों से लैस यह यात्रा-वृत्तांत लेखक कमलेश्वर का एक और अप्रतिम योगदान है ।
'कश्मीर : रात के बाद' संभवत: हिंदी में पहला ऐसा मानक प्रयास भी है जो कैमरा और कलम को एक साथ इस अंदाज़ से प्रस्तुत करता है ताकि दोनों की अस्मिता पूर्णतः मुक्त भी रहे । शायद इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि इस यात्रा-रिपोर्ताज में कश्मीर के बर्फीले तूफानों और चट्टानों के खिसकी का शाब्दिक 'रोमांच' मात्र नहीं है बल्कि यहाँ है-इतिहास और धर्म (युद्ध) को अपनी एकल परिभाषा देने के मंसूबों को तर्क  और विवेक के बल पर ध्वस्त कर सको की सहमतिजन्य प्रतिभा । कश्मीर की राजनीति में, बल्कि कहे कि अराजक 'अन्तर्राष्ट्रीय राजनीतिज्' में यह लेखक मात्र पत्रकार का तटस्थ और निष्फल बाना धारण करके प्रवेश नहीं करता बल्कि वह एक ऐसे सच्चे और खरे इंसान के रूप में हस्तक्षेप करता है जो भारतीयता को जानता है और कश्मीरियत को पहचानता है । वह प्रकृति के नैसर्गिक सौंदर्य-पाशा में बँधा, प्रकृति के अप्रत्याशित रौद्र रूप को, जान की बाजी लगाकर देखता है, तो वह आतंकवादियों के विष-की ठिकानों को भी अपने कलम और कैमरे के माध्यम से उदघाटित करता है । वास्तव में यही साहस इस यात्रा-वृतांत को अविस्मरणीयता सौंपता है ।
इस पुस्तक में कश्मीर की कुछ खंडित यात्राएँ भी हैं जिनमें जन सामान्य के प्रति लेखक की प्रतिबद्धता को शब्द-दर-शब्द पढ़ा और महसूस किया जा सकता है । परवर्ती यात्रा के रूप में कमलेश्वर ने सुलगते कश्मीर की उस झुलसन को शब्द दिए है, जिसे तमाम तकनीकी विकास के बाबजूद कैमरा पकड नहीं पाता । यह किताब मुद्रित शब्द और कैमरे के आधुनिक युग की सामर्थ्य  और सीमा का भी संभवत: अनुपम दस्तावेज साबित होगी ।

Kamleshwar

कमलेश्वर, जन्म : 6 जनवरी, 1932, मैनपुरी (उ०प्र०), शिक्षा : एम०ए० (हिंदी), इलाहाबाद विश्वविद्यालय। प्रकाशित कृतियाँ : राजा निरबंसिया, कस्बे का आदमी, बयान, जार्ज पंचम की नाक, खोई हुई दिशाएं, मांस का दरिया, इतने अच्छे दिन, कोहरा, रावल की रेल, समग्र कहानियां, दस प्रतिनिधि कहानियां, आजादी मुबारक (कहानी- संग्रह); एक सड़क सत्तावन गलियां, लौटे हुए मुसाफिर, तीसरा आदमी, समुद्र में सोया हुआ आदमी, काली आँधी, आगामी अतीत, रेगिस्तान, वही बात, सुबह दोपहर शाम, डाकबँगला, कितने पाकिस्तान, एक और चन्द्रकाता (दो भाग) (उपन्यास); कश्मीर : रात के बाद, देशन-देशांतर (यात्रान्-वृत्तांत); जो मैंने जिया, यादों के चिराग, जलती हुई नदी (आत्मकथा); नई कहानी की भूमिका, मेरा पन्ना, बंधक लोकतंत्र, सिलसिला थमता नहीं, घटनाचक्र, दस्तक देते सवाल, मेरे साक्षात्कार, अपनी निगाह में आदि (विदिध); गुलमोहर फिर खिलेगा आदि (संपादन); इंगित, संकेत, नई कहानियां, सारिका, श्रीवर्षा, गंगा, कथायात्रा, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर का संपादन (पत्रकारिता); चन्द्रकांता, आकाशगंगा, युग, रेत पर लिखे नाम, बिखेरे पन्ने, दर्पण आदि (सीरियल लेखन); आँधी, मौसम, अमानुष, द बर्निंग ट्रैन, राम बलराम, शैतान, पति-पत्नी और वह, नटवरलाल, सारा आकाश, डाकबँगला आदि लगभग 100 स्क्रिप्ट्स (फिल्में)।
स्मृति-शेष : 27 जनवरी, 2007

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