Aate Jaate Om Shwaas Mein

J.P. Sharma

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  • Year: 2014

  • Binding: Paperback

  • Publisher: Amarsatya Prakashan

  • ISBN No: 978-93-83234-12-7

मैंने ‘आते-जाते ओम् स्वास में’ का अध्ययन किया है और यह स्पष्ट रूप से सीखा है कि ओम् श्वास के साथ भीतर जाते हैं, हृदय और पूरे तन को झंकृत करते हैं श्वास के बाहर जाते हलंत ‘म्’ नासिका के बालों के जाल में छनकर बाहर जाते हें। अद्भुत दिव्य संगीत की ध्वनि प्रतिध्वनित होती है। स्पष्ट काव्य-रूप में लिखा है कि ओम् यही से लिया गया है-
हर पल है अनुभूति श्वास में,
‘ओ’ भीतर औ’ म् बाहर हैं।
ओम् उच्चरित होते भीतर,
साकारी में निराकार हैं।
ओम् श्वास से लिए गए हैं,
स्वाभाविक प्राकृतिक रूप।
सब धर्मों में सदा मान्यता,
रंक, भूप में यही अनूप।
—डाॅ. हर्षवर्धन

J.P. Sharma


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