Baarish Ke Baad

Radhey Shyam Tiwari

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  • Year: 2004

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Parmeshwari Prakashan

  • ISBN No: 9788188121311

बारिश के बाद
राधेश्याम तिवारी हिंदी के एक ऐसे कवि हैं, जो अपने आसपास के साधारण-सामान्य और लगभग घटनाविहीन जीवन से मार्मिकता को बड़े अचूक ढंग से पकडने की क्षमता रखते हैं। उनकी कविताओं में कल्पना की ऊँचाइयाँ हैं, लेकिन जैसा कि वे अपनी एक कविता 'बीज-मंत्र' में कहते हैं कि बीज का बाहर निकलकर भी धरती से जुडाव कम नहीं होता, उसी तरह उनकी कविता  का लगाव भी किसी भी हालत में इस धरती से, यहाँ के इंसान से, यहाँ के मौसमों से, अभावों और स्मृतियों से कम नहीं होता, बल्कि और सघन होता जाता है । उनकी हर कविता जीवन के बीच सहज ही मिलने वाला एक मार्मिक प्रसंग बन जाती है । यह मार्मिकता शब्द-क्रीड़ा से हासिल नहीं की गई है बल्कि जीवन की परिस्थितियों से प्राप्त की गई है। शहर तथा गाँव के बीच हिलगी हुई राधेश्याम तिवारी की कविता कई जगह गीतात्मक हो जाती है बल्कि कहीं-कहीं वे अपनी बात कहने के लिए गीत का सहारा भी लेते है, मगर दिलचस्प बात यह है कि यह कवि जीवन के प्रति हमेशा बहुत सकारात्मक है, कटु और कठोर नहीं । उसका लहजा शिकायत-भरा नहीं, ललक-भरा है । उनकी कविताओं से जीवन के दबावों-तनावों को दरगुजर नहीं किया गया है, अभावों की चर्चा से परहेज नहीं किया गया है, मगर विवशता की बजाय एक दार्शनिक ऊँचाई दी गई है । उनकी एक कविता है 'न्यूटन', जिसमें वह कहते हैं कि "न्यूटन ने यह तो सोच लिया कि सेब पेड़ से नीचे क्यों गिरता है, लेकिन यह नहीं सोचा कि नीचे गिरकर भी वह नीचे के लोगों को क्यों नहीं मिलता?" इतना ही नहीं, वे आगे कहते हैं कि "यह तो ठीक है कि गुरुत्वाकर्षण सबको अपनी ओर खींचता है, मगर जमीन में दबा हुआ बीज कैसे ऊपर उठ जाता है, न्यूटन ने यह नहीं सोचा ।" यहीं अभावों की चर्चा है, लेकिन यहाँ बेचैनी का स्वर और स्तर भिन्न है तथा इसी के साथ यह सकारात्मक स्वर भी है ।
इस संग्रह में अनेक ऐसी कविताएँ हैं जैसे 'बाकी सब माया हैं, 'पुराना पता', 'सर्कस में बाघ', ‘संबंध', 'घर', 'किराए का मकान' आदि जो हमारे इस दैनिक संसार की कविताएँ हैं मगर उससे बाहर ले जाकर विचलित करने वाली कविताएँ भी हैं। ये कविताएँ सहज हैं, क्योकि मर्मभेदी हैं । वे सहज हैं, क्योंकि मनुष्य के साथ ये प्रकृति से भी सघन रूप से जुड़ती हैं। ये सहज हैं, क्योंकि इनमें हमारा सहजात मनुष्य है, उसकी मानवीयता है, उसका राग और विराग है ।

Radhey Shyam Tiwari

राधेश्याम तिवारी
जन्म : 1 मई, 1963, ग्राम-परसौनी आनंदघन, जिला-देवरिया (उत्तर प्रदेश)
शिक्षा : स्नातकोत्तर (राजनीतिशास्त्र) (पूरी शिक्षा कटिहार, बिहार में)
प्रकाशन : 1998 से पहला कविता-संग्रह 'सागर प्रश्न' ।
हंस, समकालीन भारतीय साहित्य, इंडिया टुडे, आउटलुक, गगनांचल, आजकल, जनसत्ता, नवभारत टाइम्स, हिंदुस्तान, राष्ट्रीय सहारा आदि पत्र-पत्रिकाओं में कविताएँ, समीक्षा, वैचारिक एवं सामाजिक विषयों पर नियमित लेखन ।
साहित्य अकादेमी से प्रकाशित 'श्रेष्ठ हिंदी गीत संचयन' सहित अनेक महत्त्यपूर्ण संचयनों में रचनाएँ संकलित ।
ज्ञानपीठ से प्रकाशित 'खजुराहो की प्रतिध्वनियां' में अनेक अंग्रेजी कविताओं का हिंदी अनुवाद संकलित ।
प्रसारण : दिल्ली दूरदर्शन एव आकाशवाणी से समय-समय पर आलेख एवं काव्यपाठ ।
पुरस्कार : 'सागर प्रश्न' कविता-संग्रह के लिए 'राष्ट्रीय अज्ञेय  शिखर पुरस्कार' । 2002 का 'नई धारा साहित्य सम्मान' से सम्मानित ।

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