Chhote-Chhote Pankha

Rekha Rajvanshi

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  • Year: 2010

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Bhartiya Prakashan Sansthan

  • ISBN No: 978-81-88122-10-3

छोटे-छोटे पंख

सुबह-सुबह का सूरज आया
किरणों ने हमको सहलाया
उठो-उठो, भई उठो-उठो।

चिड़ियों ने भी शोर मचाया
शोर मचाकर, हमें बताया
ब्रश करो, भई ब्रश करो।

पत्ते डोले हौले-हौले
बजा-बजाकर ताली बोले
नहा लो, भई नहा लो।

मुन्नू जल्द हुआ तैयार
दादा जी भी रहे पुकार
दूध पियो, भई दूध पियो।

बस करती है पौं-पौं-पौं
भाग रहे पीछे दोनों
चलो-चलो, भई चढ़ो-चढ़ो।

—इसी पुस्तक की एक कविता ‘सुबह का सूरज’

Rekha Rajvanshi

रेखा राजवंशी
जन्म : 13 अक्तूबर, रेवड़ी, हरियाणा
परवरिश और शिक्षा : उत्तर प्रदेश, दिल्ली
लेखिका, कवयित्री व रेडियो कलाकार रेखा राजवंशी ने स्नातक स्तर तक हिंदी व अंग्रेजी का अध्ययन किया । मनोविज्ञान और शिक्षाशास्त्र में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की। स्पेशल एडुकेशन में मक्वारी यूनिवर्सिटी, सिडनी से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया । भारत में बी.एड. तथा टीचर ट्रेनिंग से अध्यापन किया । अब सिडनी में हाई स्कूल टीचर है । सप्ताहांत में हाई स्कूल के बच्चों को हिंदी पढ़ाने के साथ-साथ सिडनी विश्वविद्यलय में प्रौढ़ शिक्षा के अंतर्गत हिंदी पढ़ाती है ।
दिल्ली में ऑल इंडिया रेडियो के नाटक, बाल और महिला विभाग की कलाकार, दूरदर्शन के लिए स्क्रिप्ट लेखन और वोइस ओवर किया । सिडनी में एस.बी.एस. रेडियो में सात साल से कार्यक्रम योगदान देती रही है । इसके अतिरिक्त सिडनी, मेलबर्न, केनबरा और वूलून्गोंग शहर में काव्य पाठ किया है ।
अनुवाद : एन.ए.ए.टी.आई से अनुमोदित ट्रांसलेटर है, कुछ सरकारी विभागों वेबसाइट के लिए अनुवाद के अलावा ऑस्ट्रेलिया में एबोरीजनल एनीमेशन फिल्म की कहानियों का अनुवाद किया है ।
 प्रकाशित पुस्तकें : 'अनुभूति के गुलमोहर' (काव्य-संग्रह); 'ये गलियों के बच्चे' (शेध-ग्रंथ); 'छोटे-छोटे पंख' (बाल कविताएँ) ।
संपादन : 'बूमरैंग' (आंस्टेलिया से कविताएँ) ।
सह-संपादन : 'एकता का संकल्प' (इंदिरा गांधी पर आधारित कविताएँ) ।

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