Hansi Oth Per Aankhen Nam Hain

Ramdarash Mishra

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  • Year: 1997

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Parmeshwari Prakashan

  • ISBN No: 111-11-1111-111-1

मेरी समग्र ग़ज़लें यहाँ रचना-तिथि के क्रम से दी जा रही है । शुरू की ग़ज़लों पर मैंने रचना-तिथि नहीं लिखी थी अत: यहाँ अनुमान से उनके रचना-वर्ष का उल्लेख कर दिया गया है । कुछ पूर्व प्रकाशित ग़ज़लों को रूप की दृष्टि से फिर तराशा है ।
ये ग़ज़लें शास्त्रीय दृष्टि से कैसी है यह तो ग़ज़ल-शास्त्री ही जाने किन्तु मुझे विश्वास है कि कविता के पाठकों को इनमें कविता जरूर मिलेगी । मुझे इनके द्वारा अपने अनुभवों को व्यक्त करने में एक अलग तरह की तृप्ति मिली है । मेरी तृप्ति यदि पाठकों क्रो तृप्ति बन सकेगी तो अधिक सार्थक होगी ।

Ramdarash Mishra

रामदरश मिश्र

जन्म : 15 अगस्त, 1924 को गोरखपुर (उ० प्र०) जिले के डुमरी गांव में
शिक्षा : एम०ए०, पी-एच०डी०

सर्जनात्पक रचनाएँ : 'पथ के गीत', 'बैरंग-बेनाम चिट्ठियाँ', 'पक गई है धूप’, 'कंधे पर सुरज', 'दिन एक नदी बन गया', 'मेरे प्रिय गीत', 'जुलूस कहाँ जा रहा है?', 'रामदरश मिश्र की प्रतिनिधि कविताएँ', 'आग कुछ नहीं बोलती', 'शब्द सेतु', 'बारिश में भीगते बच्चे', 'ऐसे में जब कभी', 'आम के पत्ते (काव्य-संग्रह) ० 'हंसी ओठ पर आँखें नम हैं', 'बाजार को निकले हैं लोग' (ग़ज़ल-संग्रह) 'पानी के प्राचीर' , 'जल टूटता हुआ', 'बीच का समय', 'सूखता हुआ तालाब', 'अपने लोग', 'रात का सफर', 'आकाश की छत', 'आदिम राग' (बीच का समय), 'बिना दरवाजे का मकान', ‘दूसरा घर', 'थकी हुई सुबह', 'बीस बरस' (उपन्यास) ० 'खाली घर', 'एक यह', 'दिनचर्या', 'सर्पदंश', 'वसंत का एक दिन', 'इकसठ कहानियां', 'अपने लिए', 'मेरी प्रिय कहानियां', 'चर्चित कहानियां', 'श्रेष्ठ आंचलिक कहानियां', 'आज का दिन भी', 'फिर कब आएँगे ?', 'एक कहानी लगातार', 'विदूषक', 'दिन के साथ', 'मेरी तेरह कहानियाँ', 'दस प्रतिनिधि कहानियां', (कहानी-संग्रह) ० 'कितने बजे है', 'बबूल और कैक्टस', 'घर-परिवेश' (ललित निबंध-संग्रह) ० 'तना हुआ इंद्रधनुष', 'भोर का सपना', 'पडोस की खुशबू' (यात्रा-वर्णन) ० 'सहचर है समय', 'फुरसत के दिन' (आत्मकथा) ० 'स्मृतियों के छंद', 'अपने-अपने रास्ते' (संस्मरण) ० 'बूँद-बूँद नदी', 'दर्द की हंसी', 'नदी बहती है' (चुनी हुई रचनाएँ)।

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