Tukara-Tukara Waqt

Shashi Sahgal

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  • Year: 1997

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Bhartiya Prakashan Sansthan

  • ISBN No: 8847456599585

टुकड़ा-टुकड़ा वक्त
शशि सहगल की कविताओं के केन्द्रीय स्वर को जानने के लिए उनकी एक कविता 'असर' पर नज़र डाले :
झाड़ा-पोंछा
दिखने में साफ
कलफ लगी साडी-सा
कड़क व्यक्तित्व ओढ
बाहर जाना अच्छा लगता है ।

ढ़ीले-ढाले वजूद के
घर के पायदान पर ही छोड़
हीन भावना से उबरती हुई देह
दो कदम बाहर रखते ही
आत्मविश्वास से भर उठती है
कलफ़ का असर
कुछ ऐसा ही होता है ।

शशि जी की कविताएँ घर के अन्दर की कविताएँ जरूर है, लेकिन वे घर में बंद नहीं हैं और ना ही घर और परिवार के संबंध मात्र ही उनकी कविताओं की सीमा हैं । वे घर से बाहर भी झाँकती है और अपने से बाहर भी । अपने भीतर और बाहर तथा घर के अन्दर और घर से बाहर के द्वन्द्वात्मक रिश्तों की वजह से आई दरारें उनकी कविताओं का विषय बनती हैं । उनके पहले कविता-संग्रह में भी इस संवेदन के पहचान बड़े गहरे स्तर पर रही है । इस कविता-संग्रह में यह संवेदन और भी गहराया है । इसमें कहीं मूल्य तलाशने की उत्कटता भी है, 'बाजार' होते रिश्तों में कहीं खुद को बचाकर रखने की केशिश भी । यही इन कविताओं के शक्ति है ।

Shashi Sahgal

(डॉ०) शशि सहगल
जन्म : 2 अक्टूबर, 1944, लाहौर में ।
शिक्षा : एम०ए०, एम०लिट०, पी-एच०डी० ।
प्रकाशन : कविता-संग्रह : कविता लिखने के कोशिश में, टुकडा-टुकडा वक्त / सहयोगी कविता-संग्रह : नवें दशक की काव्य-यात्रा, पुनर्संभवा । कवितानुवाद : मेरे साईयाँ जिओ (भाई वीर सिंह) और पब्बी (प्रभजोत कौर) की पंजाबी कविताओं का हिन्दी में अनुवाद, साहित्य अकादेमी द्वारा प्रकाशित । कहानी : अब तक की सहयोगी कथाकार और कई कहानियाँ पत्रिकाओं में प्रकाशित । आलोचना : नयी कविता में मूल्य- बोध, घनानंद का रचनासंसार, साहित्य विधाएँ । संपादन : काव्य-परिमल । अनेक हिन्दी कविताओं का पंजाबी में और पंजाबी कविताओं का हिन्दी में अनुवाद । 'अधूरा गीत' का अनुवाद प्रकाशनाधीन । समीक्षा कर्म, कविता एवं कथा- लेखन में समान रूप से सक्रिय ।

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