Akbar-Beerbal Ki Praamaanik Kahaniyan

Hari Krishna Devsare

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  • Year: 2010

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Amarsatya Prakashan

  • ISBN No: 9788188466832

अकबर-बीरबल की प्रामाणिक कहानियां 
अकबर-बीरबल की इन कहानियों में केवल मनोरंजक, हाजिरजवाबी और चतुराई की घटनाएं नहीं हैं, बल्कि इनमें भारतीय इतिहास की दो महान् विभूतियों के व्यक्तित्व के विविध गुणों और विशेषताओं के भी दर्शन होते हैं । इन कहानियों में विद्वानों-गुणी  ज़नों का आदर है, कुशल प्रशासन है, न्याय की तराजू पर किए गए फैसले और सामान्य जनता के कल्याण हेतु कार्यों जैसे पहलू भी उजागर होते हैं ।
यों तो अकबर-बीरबल के किस्सों में काफी मिलावट हुई है, फिर भी उससे बचकर कुछ ऐसी चुनिंदा कहानियां ही यहाँ प्रस्तुत हैं, जो इतिहास की इन दोनों महान् विभूतियों की गरिमामयी छवि प्रस्तुत कर  सकें । आशा है, पाठक इन्हें रुचिकर पाएंगे ।

Hari Krishna Devsare

डॉ.  हरिकृष्ण देवसरे हिंदी के सुपरिचित लेखक हैं। हिंदी बाल-साहित्य पर हिंदी में प्रथम शोध प्रबंध प्रस्तुत कर बाल-साहित्य पर शोध की परंपरा का सूत्रपात करने में डॉ. देवसरे का बाल-साहित्य समीक्षा के क्षेत्र में प्रशंस्य योगदान है। मौलिक लेखक के रूप में डॉ.  देवसरे की बाल-साहित्य संबंधी तीन सौ पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने विविध विधाओं में भी पर्याप्त साहित्य लिखा है। ‘खाली हाथ’ (उपन्यास), ‘अगर ठान लीजिए’ (चरित्र-विकास) आदि उनकी कुछ उल्लेखनीय पुस्तकें हैं। उसी क्रम में उनकी ये पुस्तकें हैं--‘अथ नदी कथा’ और ‘पर्वतगाथा’। शोधपरक लेखन डॉ. देवसरे की विशेषता है। मीडिया के लिए भी डॉ. देवसरे की सेवाएँ उल्लेखनीय हैं। लगभग चैबीस वर्ष तक आकाशवाणी में विभिन्न पदों पर कार्य करने के अतिरिक्त आपने दूरदर्शन के लिए दस से अधिक धारावाहिकों, बीस वृत्तचित्रों एवं दस टेलीफिल्मों का लेखन, निर्देशन एवं निर्माण भी किया।
डॉ.  देवसरे कई संस्थाओं से सम्मानित और पुरस्कृत हुए हैं। आपको ‘बच्चों में विज्ञान लोकप्रियकरण’ के लिए राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा एक लाख रुपये के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान ने ‘बाल-साहित्य भारती’ पुरस्कार से सम्मानित किया और हिंदी अकादमी, दिल्ली ने ‘साहित्यकार सम्मान’ दिया। आपको पद्मा बिनानी फाउंडेशन की बाल- साहित्य के उन्नयन को समर्पित संस्था ‘वात्सल्य’ द्वारा एक लाख रुपये के ‘प्रथम वात्सल्य पुरस्कार’ द्वारा सम्मानित किया गया। 

स्मृति शेष : 14 नवंबर, 2013

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