Kahani Samagra : Nasera Sharma(3Vols.)

Nasera Sharma

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  • Year: 2011

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9789381467039

प्रख्यात कथा-लेखिका नासिरा शर्मा की कहानियाँ  समकालीन स्त्री रचनाकारों की कहानियों से कई मायनों में अलग और सर्वथा नई परिभाषा गढ़ती हुई नजर आती हैं । उनके यहाँ इनसानी रिश्ते केवल खून से ही नहीं, संवेदनाओं के उन तंतुओं से निर्मित होते हैं, जो इनसानियत के वजूद को बचाए रखने के लिए जारी हैं ।

पहले खंड की कहानियाँ परिवार, देश-समाज की सीमा को लाँघते हुए ईरान तक की यात्रा कराती हैं । ईरान के अपने प्रवास काल के दौरान लेखिका ने जिस शिद्दत से वहाँ की जीवनशैली, संस्कृति को आत्मसात् किया, उसको बहुत प्रभावी ढंग से उन्होंने इन कहानियों में अभिव्यक्त भी किया है ।  इस बहाने भारत और ईरान के प्राचीन रिश्तों की भी लेखिका शिनाख्त करती हैँ। इस खंड की कई कहानियों में लेखिका अपने अतीत के पन्ने उलटते हुए उन क्षणों को वर्तमान संदर्भों से पुन: जीवंत करने का प्रयत्न करती है, जिन पर समय की बेशुमार परतें चढ़ चुकी हैं । दरअसल इन कहानियों के जरिए लेखिका अपने अतीत में घटित उन सामाजिक-राजनीतिक घटनाओँ की पड़ताल बदले हुए समय में करती हैं, जिनका संबंध वर्तमान से विच्छेद नहीं हुआ है ।
दूसरे खंड की कहानियाँ इनसान के भीतर मौजूद शैतान को बाहर खींच निकालती हैं। सत्तालोलुपता की हवस में इनसान के हैवान में रूपांतरण की ये कहानियाँ अनेक सवालों को उठाती हैं। धर्म-स्थापना के नाम पर किसी भी प्रकार के अधार्मिक और अमानवीय क्रियाकलापों को जायज़ ठहराने वाली बीमार मानसिकता को भी ये कहानियाँ अनावृत करती हैं। इन कहानियों में समाज के निचले तबके के उन लोगों के दारुण यथार्थ की तस्वीर भी मौजूद है, जो अपना सब कुछ न्योछावर करके किसी भी देश-समाज की सांस्कृतिक नींव तैयार करते हैं। बावजूद इसके शक्तिसंपन्न और सामंती मानसिकता के लोग उनका शोषण करना अपना अधिकार समझते हैं।
तीसरे खंड में लेखिका द्वारा पिछले तीन दशक में लिखी गई कहानियाँ सम्मिलित हैं । इनमें कुछ लंबी और कुछ लघु कथाएँ भी हैं । कथानक और घटनाक्रम के आधार पर इस खंड की कहानियाँ पूर्ववर्ती दो खंडों की कहानियों से कूछ अलग नजर आती हैं । इसका कारण यह है कि इस खंड की कहानियों में लेखिका ने अपनी दृष्टि के  विस्तार को थोड़ा संघनित किया है । यही वजह है कि इनमें देश-समाज-राजनीति-इतिहास से जुड़ी कहानियों के स्थान पर इनसानी नस्ल की प्रवृतियों पर आधारित कहानियाँ पढ़ने को मिलती हैं । बहुत कम लेखक ऐसे होते हैं, जिनकी आँखें बारीक़ से बारीक रेशे को पकड़ती हैं, जिनके कान महीन से महीन आवाज को सुनते हैं और नाक हलकी से हलकी गंध ग्रहण करती है । ऐसे लेखकों को हम सहस्राक्षी लेखक भी कह सकते हैं । नासिरा शर्मा भी ऐसी ही लेखिका ।
इनसानी मनोविज्ञान का गहन विश्लेषण करती ये कहानियाँ लेखिका के भाषा-प्रवाह और ट्रीटमेंट के प्रति सजगता को भी प्रमाणित करती हैं ।

Nasera Sharma

नासिरा शर्मा
जन्म : 1948, इलाहाबाद
फारसी भाषा-साहित्य में एम०ए० हिंदी, उर्दू फारसी, पश्तो, अंग्रेजी पर गहरी पकड़।ईरानी समाज और राजनीति के अतिरिक्त साहित्य, कला व संस्कृति विषयों की विशेषज्ञ। इराक, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, ईरान तथा भारत के राजनीतिज्ञों तथा प्रसिद्ध बुद्धिजीवियों के साथ साक्षात्कार किए, जो बहुचर्चित हुए। ईरानी युद्धबंदियों पर जर्मन व फ्रेंच टेलीविजन के लिए बनी फिल्म में महत्त्वपूर्ण योगदान।
प्रकाशित कृतियां  : 'सात नदियां एक समंदर', 'शाल्मली', ‘ठीकरे की मंगनी', 'जिंदा-मुहावरे', 'अक्षयवट', 'बूँद' (उपन्यास) ० 'शामी काग़ज़', 'पत्थरगली', 'संगसार', 'इब्ने मरियम', 'सबीना के चालीस चोर', 'खुदा की वापसी', 'इंसानी नस्ल', 'दूसरा ताजमहल', 'बुतखाना', 'गूँगा आसमान', 'शीर्ष कहानियाँ' (कहानी-संग्रह) ० 'किताब के बहाने', 'औरत के लिए औरत', 'राष्ट्र और मुसलमान' (लेख-संग्रह) ०  'जहाँ फौव्वारे लहू रोते हैं' (रिपोर्ताज़) ०  'अफगानिस्तान : बुज़कशी मैदान' (दो खडों में), 'मरजीना का देश : इराक', (इलाकाई अध्ययन) ० 'शाहनामा-ए-फिरदौसी', 'गुलिस्तान-ए-सादी', 'बर्निंग पयार', 'इकोज़ ऑफ  ईरानियन  रेवोल्यूशन : प्रोटेस्ट पोयट्री', 'किस्सा जाम का', 'काली छोटी मछली', 'आवारा कुत्ता (अनुवाद) ० 'दहलीज़', 'सबीना के चालीस चोर’, (नाटक) ० 'वापसी', 'सरज़मीन', 'बदला जमाना', 'शाल्मली' (सीरियल) ० 'मां', 'तड़प', 'आया बसंत सखी', 'काली मोहिनी', 'सेमल दरख्त', 'बावली' (टी०वी० फिल्म) ० 'पढ़ने का हक', 'सच्ची सहेली', 'गिलोबी', 'धन्यवाद ! धन्यवाद !' (साक्षरता) ० 'संसार अपने-अपने' (बाल-साहित्य) ० 'सारिका', 'पुनश्च' का ईरानी क्रांति विशेषांक (संयोजन एवं अनुवाद)

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