Kharra Aur Anya Kahaniyan

Subhash Sharma

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  • Year: 2018

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-81-936159-8-0

‘आजादी! वह भी औरतों की! क्या होती है यह आजादी? इसका रंग क्या होता है? बू क्या होती है? स्वाद क्या होता है? काश, एक बार मिल जाती तो मैं उसे छूकर, सूंघकर, चखकर देखती। फिर उसे पकड़कर कलेजे से भींचकर रोती...।’—प्रस्तुत कहानी संग्रह खर्रा और अन्य कहानियां की कहानी ‘कुहुकि कुहुकि जिया जाय’ की इन पंक्तियों में जो प्रश्नाकुलता है, वह बहुत मूल्यवान है। कोई भी रचना यदि सलीके से सवाल उठाने में कामयाब हो जाए तो वह अपने सामाजिक दायित्व की पूर्ति कर लेती है। ‘खर्रा और अन्य कहानियां’ संग्रह की सभी कहानियां समकालीन जीवन के छोटे-छोटे संदर्भों को बड़े परिप्रेक्ष्य में व्याख्यायित करती हैं। इन कहानियों के लेखक सुभाष शर्मा यथार्थवादी लेखक हैं। कहानी में कथानक, सामाजिक सरोकार, विवरणधर्मिता और युक्तिसंगत समापन में उनका भरोसा है। यही कारण है कि सुभाष की कहानियां बेहद पठनीय हैं और पाठक की चेतना को झकझोरती हैं।
इस संग्रह की लगभग सभी कहानियां व्यवस्था और सत्ता के भीतरी सच को बयान करती हैं। अनेक कहानियां शिक्षा तंत्र के तहखानों को रोशनी में लाती हैं। योग्यता, अवसर और दायित्व का उपहास करती स्थितियों व मनोवृत्तियों को पूरी संवेदनशीलता के साथ कहानीकार ने उजागर किया है। इस संग्रह में स्त्री के  संघर्षमय संसार को चित्रित किया गया है। बिना किसी विमर्श के जाल में उलझे हुए लेखक ने स्मरणीय कहानियां लिखी हैं।
‘खर्रा और अन्य कहानियां’ संग्रह की एक महत्त्वपूर्ण विशेषता यह भी है कि बिना लाउड हुए या बिना प्रचारात्मक हुए सुभाष शर्मा ने वर्तमान राजनीति के बहुलांश चरित्र को कहानियों में उतार दिया है। इस चरित्र को चित्रित करने में लेखक की अर्थगर्भित भाषा महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ‘दास्तान-ए-सुबूत’ में लेखक कहता है, ‘पहले कार्यकाल में वह जान गए थे कि खजाना कहां-कहां है। चुनाव, मुकदमा, राजनीतिक षड्यंत्र आदि में जितना खर्च हुआ था, उसकी भरपाई उन्होंने सुपरसोनिक गति से करना शुरू कर दिया।’ ऐसी व्यंजक भाषा में रची गईं ये कहानियां यथार्थ को पूरी प्रामाणिकता के साथ प्रस्तुत करती हैं। ‘खर्रा और अन्य कहानियां’ निश्चित रूप से एक पठनीय और उल्लेखनीय कहानी संग्रह है।

Subhash Sharma

डाॅ. सुभाष शर्मा
जन्म: 20 अगस्त, 1959, सुल्तानपुर (उ. प्र.)
शिक्षा: एम.ए., एम.फिल. (समाजशास्त्र), जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से। एम.ए. ;विकास प्रशासन एवं प्रबंधन, मैनचेस्टर विश्वविद्यालय, इंगलैंड से 1997-98 में। पटना विश्वविद्यालय से पीएच.डी. (समाजशास्त्र) 2003 में
प्रकाशित कृतियां: ‘जिंदगी का गद्य’, ‘अंगारे पर बैठा आदमी’, ‘दुश्चक्र’, ‘बेजुबान’, ‘भारत में बाल मजदूर’, ‘भारत में शिक्षा व्यवस्था’, ‘भारतीय महिलाओं की दशा’, ‘हिंदी समाज: परंपरा एवं आधुनिकता’, ‘शिक्षा और समाज’, ‘विकास का समाजशास्त्र’, ‘भूख तथा अन्य कहानियां’, ‘कुंअर सिंह और 1857 की क्रांति’, ‘भारत में मानवाधिकार’, ‘संस्कृति और समाज’, ‘शिक्षा का समाजशास्त्र’, ‘हम भारत के लोग’, ‘भारत के महान वैज्ञानिक’, ‘मीठी बोली’, ‘डायलेक्टिक्स आॅफ अग्रारियन डेवलपमेंट’, ‘व्हाइ पीपल प्रोटेस्ट’, ‘सोशियोलाॅजी आॅफ लिटरेचर’, ‘डेवलपमेंट एंड इट्स डिस्कांटेन्ट्स’, हिंदी की प्रमुख पत्रिकाओं में कई कहानियां, कविताएं एवं लेख प्रकाशित
पुरस्कार: राजभाषा विभाग, बिहार सरकार से अनुवाद के लिए पुरस्कार स बिहार राष्ट्रभाषा परिषद, पटना से कहानी लेखन हेतु साहित्य साधना पुरस्कार से भारत में मानवाधिकार के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (नयी दिल्ली) से प्रथम पुरस्कार
संप्रति: भारत सरकार की सेवा में (1984 से भा. प्र. से. में उच्च पदों पर कार्य करने का अनुभव)

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