Naari Hirdaya Tatha Anya Kahaniyan

Subhadra Kumari Chauhan

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  • Year: 2016

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Arya Prakashan Mandal

  • ISBN No: 9788189982102

नारी हृदय तथा अन्य कहानियाँ 
'खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी' कविता की धार पंक्तियों से पूरा देश आजादी की लड़ाई के लिए उद्वेलित हो गया था। ऐसे कई रचनाकार हुए हैं जिनकी एक ही रचना इतनी ज्यादा लोकप्रिय हुई कि उसकी आगे की दूसरी रचनाएँ गौण हो गई, जिनमें सुभद्राकुमारी भी एक है ।
इस एक कविता के अलावा बच्चों के लिए लिखी उनकी कविताएं भी हिंदी में बाल कविता का नया अध्याय लिखती है । उनकी कहानियाँ भी नारी स्वातंत्र्य का नया उदूघोष करती है । उनके जैसी उपेक्षित कवयित्री के समग्र मूल्यग्रेकन के लिए नया इतिहास लिखने की जरूरत है । सुभद्राकुमारी चौहान सिर्फ एक कवयित्री ही नहीं थीं, देश के स्वतंत्रता संग्राम में भी उनका अमूल्य योगदान रहा है । उत्तर भारत के राजनैतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक जीवन में सुभद्रा जी के व्यक्तित्व की गाजी छाप रही है ।
समाज की अनीतियों से उत्पन्न जिस पीड़ा को वे व्यक्त करना चाहती थीं उसकी अभिव्यक्ति का उचित माध्यम गद्य ही हो सकता था, अत: सुभद्रा जी ने कहानियाँ लिखी । उनकी कहानियों में देश-पेस के  साथ-साथ समाज को, अपने व्यक्तित्व को प्रतिष्ठित करने के लिए संघर्षरत नारी की पीड़ा और विद्रोह का स्वर मिलता है ।

Subhadra Kumari Chauhan

जनमनमयी सुभद्राकुमारी चौहान
बैंजामिन फ्रैंकलिन ने एक जगह लिखा  है- 'यदि जाप चाहते हैं कि मरने के बाद दुनिया आपको जल्दी भुला न दे, तो कुछ ऐसा लिखें जो पढ़ने योग्य हो या कुछ ऐसा करें जो लिखने योग्य हो ।'
सुभद्रा जी का व्यक्तित्व और कृतित्व फ्रैंकलिन की इस उक्ति पर एकदम खरा उतरता है । उन्होंने ऐसा लिखा जो हमेशा पढ़ने योग्य है और ऐसा किया जो हमेशा लिखने योग्य है ।
सुभद्राकुमारी चौहान ने जो रचा वही किया और जो जिया वही रचा । वे हिंदी ही नहीं, अपितु बीसवीं शताब्दी के भारतीय साहित्य की सर्वाधिक यशस्वी कवयित्रियों में गिनी जाती हैं । सुभद्राकुमारी की भाषा की सादगी तो आज के कवियों तथा समीक्षकों के लिए एक चुनौती बनी हुई है । वे प्राचीन भारतीय ललनाओं के शौर्य की याद दिलाने वाली कर्मठ महिला थीं और उनकी अनेक कविताएं भारतीय स्यतंत्रता संघर्ष के दौरान लाखों देशवासियों के होंठों पर थीं और अब भी है । आश्चर्य नहीं कि हिंदी के महानतम कवि निराला, दिनकर तथा मुक्तिबोध भी सुभद्रा की कविता के प्रशंसक थे ।
मैं सामाजिक कार्यकत्री, देशसेविका, कवि, लेखिका तो जो थीं सो थीं ही, सबसे बड़ी तो उनकी मनुष्यता बी । उनका सहज-स्नेहमय उदार हृदय था, जिसने अपने-पराए सबको आत्मीय बना लिया था ।
हिंदी प्रदेशों के नवजागरण और सुधार-युग को सुभद्राकुमारी चौहान ने अपने रचनाकर्म से जन-जन तक पहुंचाने का काम निर्भयता से किया है ।

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