Neend Se Pahale

Soma Bharti

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  • Year: 2011

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9789381467008

नींद से पहले
सोमा भारती की कहानियां हमें उस जानी-पहचानी निम्न- मध्यमवर्गीय दुनिया में ले चलती हैं, जिनसे हम जानकर भी अनजान बने रहते हैं, जिन्हें हम देखकर भी अनदेखा किए रहते हैं।
इनके पात्र, चाहे वह ‘जस्सो मासी मर गई’ की जस्सो मासी हों या ‘नींद से पहले’ के रमापति, ‘किराये के मकान’ की पेइंग गेस्ट हो या कोई अन्य, मोमबत्तियों की तरह हवाओं में जूझते, जलते-गलते रहते हैं। वे आपसे दया की भीख नहीं मांगते, लेकिन समय, संयोग और नियति ने उन्हें जिस मुकाम पर ला खड़ा किया है, उसका दीदार जरूर कराती हैं कि देखो, यह मैं हूं, यह तुम भी हो सकते थे।
सोमा ने अभिनय और एंकरिंग आदि अभिव्यक्ति के जिन मंचों पर काम किया है, उसका लाभ उनकी भाषा-भंगिमा, भाव और बोध को मिला है। कहानियों के रचाव-रसाव के लिए सोमा को किसी सायासता की जरूरत नहीं पड़ती, भाषा-शिल्प के दरवाजे नहीं खटखटाने पड़ते, न ही चैंकाने वाले चमत्कारों के टोने-टोटके टटोलने की आवश्यकता होती है। कहानियों की सहज संवेदना ही उनकी शक्ति है, जिनकी तासीर खुद-ब-खुद आपको पढ़ने के लिए आमंत्रित करती है।
सोमा की कहानियां फास्ट ट्रैक की कहानियां नहीं हैं। जिंदगी की पहेलियां और अनिर्णय की धुंध, ठहरी- ठहरी-सी गति, ऊंघते-ऊंघते-से कस्बाई परिवेश और रिसते-रिसते-से यथार्थ! सोमा ने दूसरी कहानियां न भी लिखी होतीं, उनकी अकेली कहानी ‘जस्सो मासी मर गई’ ही उन्हें अमर बना सकती है।
--संजीव

Soma Bharti

सोमा भारती
कथाकार सोमा भारती की कहानियां हंस, कथादेश सहित विभिन्न प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं। इनके लिखे रेडियो नाटक भी आकाशवाणी से प्रसारित होते रहे हैं।
पहले कहानी-संग्रह ‘धातुवृक्ष’ ने पाठकों का ध्यान खींचा था और उसके लिए उन्हें सन् 2000 का वी० एन०  गाडगिल सम्मान भी मिला था।
पटना विश्वविद्यालय से आधुनिक इतिहास में एम० ए०  सोमा भारती लेखन के अलावा सामाजिक गतिविधियों में प्रतिभागिता और अभिनय के लिए भी जानी जाती हैं। उन्होंने रेडियो नाटकों और टीवी सीरियलों में भी काम किया है।

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