Prati Shurti

Shree Naresh Mehta

Availability: In stock

Seller: KGPBOOKS

Qty:
350.00 315 + Free Shipping


  • Year: 2013

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788170167006

प्रति श्रुति : श्रीनरेश मेहता की समय कहानियाँ 
श्रीनरेश मेहता का कथा-गद्य, जैनेंद्र और अज्ञेय की परंपरा मेँ रखकर देखा जाए तो समाज और अध्यात्म, राष्ट्र और राजनीति, जीवन और दर्शन से संपृक्त वाद्य है । वे न तो जैनेंद्र का प्रतिबिंब बने और न ही अज्ञेय की छाया । उन्होंने सर्वथा स्वायत्त और स्वाधीन कथा साहित्य लिखा जिसमें काव्यात्मक रस भी है और जिसका आस्वाद हमारे सामाजिक और संस्कृतिक भाव-बौधों को प्रगल्भ भी बनाता है। श्री मेहता जी की भाव-दृष्टि, अंतर्दृष्टि और जीवन-दृष्टि उनके कथा-गद्य में जिस प्रकार प्रकट हुई है उससे लगता है कि श्रीनरेश जी ने नई कथा-भाषा रचकर हिंदी को एक सांस्कृतिक शक्ति का लोक संस्करण सौंपा है। भाषा अपनी सर्जनात्मक शक्ति में जब सार्थक होती है तो वह स्वयं ही समाज और संस्कृति को अपने में समा लेती है । श्रीनरेश जी ने अपने कथा-शिल्प से भाषा की संभावनाओं को विराट बनाया, गद्य की एक नई शैली विकसित की और यह सिद्ध किया कि एक जीवंत भाषा और सजीव भाषा किस पवार अपनी सांस्कृतिकता और आंचलिक नास्टिलजिया को एक साथ एकाकार कर सकती है । श्रीनरेश जी का समूचा गद्य-साहित्य और विशेष रूप से कथा-साहित्य अपने ऐतिहासिक और आधुनिक दोनों ही परिप्रेक्ष्यों में गहन शोध और विमर्श की माँग करता है । एक कवि और सर्जक को मात्र 'वैष्णव' कहकर ब्रांड नाम से सज्जित कर देना पर्याप्त नहीं है बल्कि उनकी वैष्णवता के पीडालोक को किसी गांधी की तरह बाहर निकाल नरसिंह मेहता के गीत 'वैष्णव जन' की तरह लोकव्यापी बनाना होगा । श्रीनरेश मेहता जैसा सर्जक अतीत की इतिहास-वस्तु बनकर, वर्तमान की संज्ञा से पृथक नहीं किया जा सकता और इसीलिए उनकी सर्जन-यात्रा की सार्थकता तभी सिद्ध होगी जब हिंदी मानस उनमें निहित समस्त संभावनाओं को समय स्मृति और अवकाश तीनो में रखकर एक ऐसे श्रीनरेश मेहता का अन्वेषण करे जो हिंदी साहित्य की चेतना का नरेश हो, सृजन की उस्कृष्टता का प्रतिमान हो और अपनी सांस्कृतिक सामाजिकता का अद्वितीय उदाहरण हो ।

Shree Naresh Mehta

श्रीनरेश मेहता
जन्म : 15 फरवरी, 1922 ग्राम दिल्लोद, शाजापुर (म० प्र० )
शिक्षा -
प्रारंभिक : धरमपुरी, बदनावर, नरसिंहगढ़
इंटरमीडिएट : माधव कॉलिज उज्जैन
एम० ए० : काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी
सेवा -
सेना में सेकेंड लेफ्टिनेंट, आकाशवाणी में कार्यक्रम अधिकारी
संपादन -
'साहित्यकार', 'कृति' , 'भारतीय श्रमिक'
अन्य उपलब्धियां -
निदेशक, प्रेमचंद सृजन पीठ, उज्जैन (1985 से 1992)
विश्व कविता समारोह, युगोस्लाविया में भागीदारी
दैनिक 'चौथा संसार', इंदौर का संपादन ।
सम्मान -
मध्य प्रदेश का राजकीय सम्मान (1973)
सारस्वत सम्मान, भोपाल (1984)
मध्य प्रदेश का शिखर सम्मान (1984)
उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान सम्मान (1985)
हिंदी साहित्य सम्मेलन का मंगला प्रसाद पारितोषिक (1985)
साहित्य अकादेमी पुरस्कार (1988)
भारत- भारती सम्मान (1990)
भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार (1992)

स्मृति शेष : 22 नवंबर, 2000

Scroll