Yahin Kahin Hoti Thi Zindagi

Ajeet Kaur

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  • Year: 2017

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-93-81467-84-8

अजीत कौर की अपनी एक खास ‘कहन’ है, जिसके कारण उनकी कहानियां बहुत सादगी के साथ व्यक्त होती हैं और पाठकों की संवेदना में स्थान बना लेती हैं। ‘यहीं कहीं होती थी जिंदगी’ उनका नया कहानी संग्रह है। पंजाबी से हिंदी में अनूदित ये कहानियां विषयवस्तु से नयापन लिए हैं और शिल्प के एतबार से पाठक को अजब सी राहत देती हैं। एक एक महत्त्वपूर्ण कहानी संग्रह है, न केवल पठनीयता से समृद्ध है बल्कि एक दार्शनिक वैचारिक संपदा से भी संपन्न है। अजीत कौर की रचनात्मक सुघड़ता तो सर्वोपरि है ही।

Ajeet Kaur

अजीत कौर पंजाबी की वरिष्ठ कथाकार हैं और दो खंडों में प्रकाशित उनकी आत्मकथा बेजोड़ है जो न तो नॉस्टैल्जिया है, न रोमांटिक क्षणों के जुगनू पकड़ने को लालसा। यह बीते समय की चिर-फाड़ है जो आखिर में निजी अंधेरों की ओर पीठ कर लेती है और वर्तमान से रूबरू होती हैं। उनकी आत्मकथा गुज़रे वक़्त की राख में से जलते पंखों वाले पक्षी की तरह उठती है और नई दिशाओं की खीज में उड़ान भरती है। अनेक कहानी-संग्रह तथा उपन्यास प्रकाशित। उल्लेखनीय : 'गुलबानो', 'महिक दी मौत', 'बुतशिकन', 'फालतू औरत', 'सावियां चिड़ियां', 'मौत अली बाबे दी', 'काले कुएं', 'ना मारो', 'नवंबर चौरासी', 'नहीं सानू कोई तकलीफ नहीं', 'कसाईबाड़ा' (कहानी-संग्रह), 'धुप्प वाला शहर', 'पोस्टमार्टम', 'गौरी' (उपन्यास), 'तकिये दा पीर' (रेखाचित्र), 'कच्चे रंगां दा शहर : लंदन', (यात्रावृत्त), 'खानाबदोश', 'कूड़ा-कबाड़ा' (आत्मकथा) । उनकों कृतियों के अनेक भारतीय और विदेशी भाषाओं में अनुवाद हो चूके हैं और उनकी रचनाओं की कई अंतर्राष्ट्रीय संकलनों में शामिल किया गया है। 1986 का साहित्य अकादमी पुरस्कार अजीत कौर को उनकी आत्मकथा 'खानाबदोश' के लिए दिया गया और 2006 में उन्हें पद्मश्री से अलंकृत किया गया । पूरी दुनिया से जब एक हजार प्रतिबद्ध महिलाओं को अमन के लिए जिदगी समर्पित कर देन के उपलक्ष्य में, दो साल की खोजबीन के बाद, नोबेल शांति पुरस्कार के लिए इकट्ठा किया गया तो अजीत कौर भी उनमें शामिल थीं। अजीत कौर कहती हैं : मैं तो 'मैड ड्रीमर' हूँ। पागल, सपने-साज़ । सिर्फ नासमझी के काम किए हैं, सिवाय इसके कि विलक्षण प्रतिभासंपन्न बेटी अर्पणा कौर को जन्म देकर, उसे बड़ी मुहब्बत से तराशा है। उसका नाम लेकर वह गर्व से कहती हैं : हां, मैं अर्पणा की माँ हूं । एक विशिष्ट कथाकार, जुझारू महिला और अद्धभुत इंसान का नाम है अजीत कौर।

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