Bistar Aur Aakaash

Ramakant

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  • Year: 1996

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Jagat Ram & Sons

  • ISBN No: 1111111111111

बिस्तर और आकाश
रमाकांत को निम्नमध्यवर्ग के जीवन का चितेरा कहा जाता रहा है । उनकी रचनाओं में शहरी निम्नमध्यवर्ग को जितना स्थान मिला, उतना और किसी के साहित्य में दुर्लभ है ।
समस्या नई बस्तियों में बसने आये कमजोर आय वर्ग के लोगों की हो या कस्बों से नौकरी के सिलसिले में आये लोगों की-रमाकांत ने अपनी रचनाओं में उनकी आर्थिक, मानसिक, सामाजिक स्थितियों-परिस्थितियों का बारीकी से चित्रण किया है ।
आकस्मिक मृत्यु से पूर्व के कई वर्ष रमाकांत ने स्वतंत्र लेखन में गुजारे, और इस दौर में साम्यवाद के पतन और असफलता के कारणों की पड़ताल कर एक बृहद उपन्यास लिखा ।
संभवत: उस बडे प्रयोजन में जुट जाने के चलते इन तीन लघु उपन्यासों को पुस्तक रूप में प्रकाशित नहीं किया जा सका । बहरहाल, बिस्तर और आकाश, मैं, अकेले में, और एक विपरीत कथा शीर्षक ये आकार से छोटे लेकिन कथा में बडे तीन उपन्यास पाठको को अपने जाने-माने रचनाकार की मकम्मल मौजूदगी का अहसास करवाएँगे ।

Ramakant

रमाकांत
हिंदी अकादमी दिल्ली से हिंदी सेवा के लिए सम्मानित रमाकांत का जन्म 2 दिसंबर, 1931 को ग्राम बैरौधा, जिला मिर्जापुर (उ०प्र०) में हुआ । 1951 में स्नातक की उपाधि पाई । एम० ए० और एल० एल० बी०  की पढाई अधूरी छोड़नी पडी ।
इंडियन एयरलाइंस की नौकरी से जीविकोपार्जन की शुरुआत की । बाद में पत्रकारिता में आये और अंतिम कुछ वर्ण स्वतंत्र लेखन के अतिरिक्त 'क्रासाद' नामक साप्ताहिक पत्र का प्रकाशन किया ।
प्रकाशित कृतियाँ : जुलूस वाला आदमी, छोटे-छोटे महायुद्ध, तीसरा देश, प्यादा फर्जी अर्दब, उपसंस्कार, खोई हुई आवाज, दरवाजे पर आग, समाधान, टूटते-जुड़ते स्वर, बम्बई की बिल्ली (उपन्यास), जिन्दगी भर का झूठ, उसकी लडाई, कार्लो हब्शी का संदूक, एक विपरीत कथा, चर्चित (कहानी-संग्रह) ।


स्मृति-शेष : 6 सितम्बर, 1991

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