Dharmkshetre Kurukshetre

Shanker Shesh

Availability: In stock

Seller: KGPBOOKS

Qty:
70.00 63 + Free Shipping


  • Year: 2009

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Jagat Ram & Sons

  • ISBN No: 9788188125739

धर्मक्षेत्रे-कुरुक्षेत्रे 
धृतराष्ट्र का विवाह! अंधे को चतुर्भुज बनाना ! कोण देगा अनंत अँधेरे को अपनी कन्या ? कौन करेगा अपंग जीवन का वरण ? प्रश्न टेढा था । सत्यवती दबाव डाल रही यी। लगातार पडी थी  मेरे पीछे ।
माँ को तो एक बार समझा भी लो, दादी को समझाना कठिन होता है । पौत्र चाहे लूला हो, लँगडा हो, अपाहिज हो, लेकिन उसका ब्याह होना बहुत जरूरी है । आज़ तक समझ में नहीं आया, मौका पाते ही एक स्त्री दूसरी स्त्री पर अत्याचार क्यों करने लगती है । सत्यवती क्यों नहीं सोचती ।  अंधे से ब्याह करने वाली लड़की को आजन्म कारावास भोगना पडेगा । सारी जिदगी अंधे की पत्नी कहाना होया । राजघराने का आदमी हुआ तो क्या हुआ, अंधा तो अंधा है,  रहेगा । लेकिन सत्यवती को समझाता कौन ! मेरा पिता तो उसे समझा नहीं सका, फिर मैं किस खेत की मूली था !
इच्छा  हुई अपना उदाहरण सामने क्यों न रखूँ। आखिर मैं भी पूरे जीवन बिना स्वी के रह सका या नहीं । सशक्त ददेवपुत्र-सा दिखाई देन वाला में । तो यह 'अंधा क्यों नहीं रह सकता । मेरे मामले में  सत्यवती इतनी कठोर क्यों हो गई थी और अब पौत्र  के मामले में। (इसी उपन्यास से)

Shanker Shesh

शंकर शेष
2 अक्तूबर, 1933, बिलासपुर (म.प्र.) में जन्म
नागपुर विश्वविद्यालय से 1956 में बी.ए. ऑनर्स (प्रथम श्रेणी) 
1960 में पी-एच.डी.
बंबई विश्वविद्यालय से 1976 में एम.ए. लिंग्विस्टिक (प्रथम श्रेणी)
वर्ष 1956 से जीवनपर्यंत रंगमंच से संबद्ध
मध्य प्रदेश शासन द्वारा ‘बाढ़ का पानी: चंदन के द्वीप’ और 
‘बंधन अपने-अपने’ कृतियां पुरस्कृत 
फिल्म ‘दूरियां’ के लिए ‘फिल्मफेयर पुरस्कार’ प्राप्त
फिल्म ‘घरौंदा’ तथा ‘दूरियां’ के लिए ‘आशीर्वाद पुरस्कार’ प्राप्त
साहित्य कला परिषद, दिल्ली द्वारा ‘कोमल गांधर’ पुरस्कृत
28 अक्तूबर, 1981 को श्रीनगर (कश्मीर) में निधन।

Scroll