Dr. Siddharth

Kavita Surabhi

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  • Year: 2008

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Vandana Book Agency

  • ISBN No: 9788189424244

डॉ० सिद्धार्थ
'डॉ० सिद्धार्थ' लेखिका का पहला उपन्यास है। उनकी दृढ मान्यता है कि जहाँ समाज में विडंबनाएं, विसंगतियां, अपराध, पीडा, विकृतियाँ और भोगवादी  राक्षसी अपसंस्कृति है, वहीं डॉ० सिद्धार्थ जैसी निर्मापाधर्मा शक्तियां भी हैं। सच्चे, निर्मल और सात्यिक जीवन में बहुत आकर्षण है; किंतु उसे अंगीकार करने का मूल्य असाधारण है । अत: एक शाश्वत प्रश्न हमारे सामने है कि क्या कोई व्यक्ति धर्म की राह पर चलकर भी सामाजिक दृष्टि से सफल हो सकता है ?
शिष्या  के रूप से दामिनी, अपने गुरु के स्नेह का सुख पाती हे। समय के साथ डॉ० सिद्धार्थ की बौद्धिकता, उसकी प्रतिभा को ही नहीं, उसकी आत्मा को भी सँवारती है । वह समझ पाती है कि चमक और दिव्यता में अंतर होता है । लौकिक सफलताओं की चमक हमारी आँखों को चौंधियाती है और आत्मिक विकास हमें दिव्यता से भर देता है। अध्यापक की बुद्धि से उच्च है उसका विवेक, और विवेक से उच्चतर  है उसका आचरण । आचार्य वही है, जो आचरण को शुद्ध ही नहीं दिव्य भी कर दे । डॉ. सिद्धार्थ का चरित्र इन सिद्धांतों का मूर्तिमंत रूप है ।

Kavita Surabhi

डॉ० कविता सुरभि
जन्म : 03 फरवरी, 1974 ई०, मुरादाबाद। 
शिक्षा : स्कूली शिक्षा उत्तर प्रदेश में प्राप्त की।  हिंदी साहित्य में बी०ए० ऑनर्स, एम०ए०, एम०फिल० तथा पी-एच०डी० (नरेन्द्र कोहली के उपन्यासों में पौराणिकता और आधुनिकता का द्वंद्व) दिल्ली विश्वविद्यालय से सन् 2005 ई० में।
सृजन : मूलतः कथाकार ।
सन् 1998 ई० से कहानियों का नियमित प्रकाशन।  कहानियां क्रमश: उपन्यासिवऩओं में ढल गईं, जिनमें सांस्कृतिक चेतना प्रखर रूप में प्रज्वलित है। अध्यात्म उनका प्रिय क्षेत्र है ।
प्रकाशन : समाज को आंदोलित करते नरेन्द्र कोहली के उपन्यासों को डॉ० कविता सुरभि ने कुछ इस प्रकार खँगाला है कि उपन्यासों का ऐसा सृजनात्मक विश्लेषण कभी-कभी ही सामने आता है । हिंदी साहित्य में सर्जनात्मक आलोचना का इस कोटि का दूसरा उदाहरण शायद ही हो । नरेन्द्र कोहली के उपन्यास 'तोडो, कारा तोडो' पर किया गया शोध, 'पौराणिक उपन्यास : समीक्षात्मक अध्ययन' नाम से प्रकाशित ।
नरेन्द्र कोहली के रामकथा पर आधृत उपन्यास 'अभ्युदय' पर स्वतंत्र रूप से किया गया शोध 'अभ्युदय : संवेदना का विकास' के रूप में प्रकाशित।
प्रकाश्य : निर्जला (उपन्यासिका), कृत्या  (उपन्यासिका), समर्पण (उपन्यास) ।

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