Kaagaz Ki Naav

Nasera Sharma

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  • Year: 2014

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9789383233861

नासिरा शर्मा हिंदी कथा साहित्य में अपनी अनूठी रचनाओं के लिए सुप्रसिद्ध हैं। उनकी कथा रचनाएं समय और समाज की भीतरी तहों में छिपी सच्चाइयां प्रकट करने के लिए पढ़ी व सराही जाती हैं। ‘काग़ज़ की नाव’ नासिरा शर्मा का नया और विशिष्ट उपन्यास है। यह उपन्यास बिहार में रहने वाले उन परिवारों का वृत्तांत है, जिनके घर से कोई न कोई पुरुष खाड़ी मुल्कों में नौकरी करने गया हुआ है। वतन से दूर रहने वाले यहां छोड़ जाते हैं बुजुर्गों से लेकर बच्चों तक का भरा-पूरा संसार। खाड़ी मुल्कों से आने वाले रुपए...और रिश्तों के अंधेरे उजाले। ‘काग़ज़ की नाव’ शीर्षक एक रूपक बन जाता है, यानी ज़रूरतों और ज़िम्मेदारियों के समंदर को चंद रुपयों के सहारे पार करने की कोशिश।
उपन्यास महजबीं और अमजद की बड़ी बेटी महलकष के पारिवारिक तनाव को केंद्र में रखकर विकसित हुआ है। महलकष के ससुर ज़हूर और ख़ाविन्द ज़ाकिर के बीच भावनाओं का जो चित्रण है वह पढ़ने योग्य है। मुख्य कथा के साथ भोलानाथ, कैलाश, बिंदू, सुधा, कांता, राजेश, त्रिसुलिया, क्रांति झा और मुक्ति झा आदि चरित्रों की बेहद मानीख़ेज़ उपकथाएं हैं।
सबसे मार्मिक गाथा है मलकषनूर की। मलकषनूर यानी प्रकाश की देवी। मलकषनूर अपने अस्तित्व की रोशनी तलाश कर रही है, उन अंधेरों के बीच जो सदियों से औरत के नसीब का हिस्सा बने हुए हैं। मलकषनूर की इस तलाश का अंजाम क्या है, इसे लिखते हुए नासिरा शर्मा ने विमर्श और वृत्तांत की ऊंचाइयों को छू लिया है।
नासिरा शर्मा यथार्थ के पथरीले परिदृश्य में उम्मीद की हरी दूब बखूबी पहचान लेती हैं। किस्सागोई उनका हुनर है। उनके पास बेहद रवां दवां भाषा है। सोने पर सुहागा यह कि इस उपन्यास में तो भोजपुरी भी खिली हुई है।
‘काग़ज़ की नाव’ ज़िंदगी और इनसानियत के प्रति हमारे यकीन को पुख़्ता करने वाला बेहद ख़ास उपन्यास है।

Nasera Sharma

नासिरा शर्मा
जन्म : 1948, इलाहाबाद
फारसी भाषा-साहित्य में एम०ए० हिंदी, उर्दू फारसी, पश्तो, अंग्रेजी पर गहरी पकड़।ईरानी समाज और राजनीति के अतिरिक्त साहित्य, कला व संस्कृति विषयों की विशेषज्ञ। इराक, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, ईरान तथा भारत के राजनीतिज्ञों तथा प्रसिद्ध बुद्धिजीवियों के साथ साक्षात्कार किए, जो बहुचर्चित हुए। ईरानी युद्धबंदियों पर जर्मन व फ्रेंच टेलीविजन के लिए बनी फिल्म में महत्त्वपूर्ण योगदान।
प्रकाशित कृतियां  : 'सात नदियां एक समंदर', 'शाल्मली', ‘ठीकरे की मंगनी', 'जिंदा-मुहावरे', 'अक्षयवट', 'बूँद' (उपन्यास) ० 'शामी काग़ज़', 'पत्थरगली', 'संगसार', 'इब्ने मरियम', 'सबीना के चालीस चोर', 'खुदा की वापसी', 'इंसानी नस्ल', 'दूसरा ताजमहल', 'बुतखाना', 'गूँगा आसमान', 'शीर्ष कहानियाँ' (कहानी-संग्रह) ० 'किताब के बहाने', 'औरत के लिए औरत', 'राष्ट्र और मुसलमान' (लेख-संग्रह) ०  'जहाँ फौव्वारे लहू रोते हैं' (रिपोर्ताज़) ०  'अफगानिस्तान : बुज़कशी मैदान' (दो खडों में), 'मरजीना का देश : इराक', (इलाकाई अध्ययन) ० 'शाहनामा-ए-फिरदौसी', 'गुलिस्तान-ए-सादी', 'बर्निंग पयार', 'इकोज़ ऑफ  ईरानियन  रेवोल्यूशन : प्रोटेस्ट पोयट्री', 'किस्सा जाम का', 'काली छोटी मछली', 'आवारा कुत्ता (अनुवाद) ० 'दहलीज़', 'सबीना के चालीस चोर’, (नाटक) ० 'वापसी', 'सरज़मीन', 'बदला जमाना', 'शाल्मली' (सीरियल) ० 'मां', 'तड़प', 'आया बसंत सखी', 'काली मोहिनी', 'सेमल दरख्त', 'बावली' (टी०वी० फिल्म) ० 'पढ़ने का हक', 'सच्ची सहेली', 'गिलोबी', 'धन्यवाद ! धन्यवाद !' (साक्षरता) ० 'संसार अपने-अपने' (बाल-साहित्य) ० 'सारिका', 'पुनश्च' का ईरानी क्रांति विशेषांक (संयोजन एवं अनुवाद)

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