Manohar Shyam Joshi Ke Teen Upanyas

Manohar Shyam Joshi

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  • Year: 2019

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788170167884

मनोहर श्याम जोशी के तीन उपन्यास

हरिया हरक्यूलीज़ की हैरानी: ‘कुरु-कुरु स्वाहा’ और ‘कसप’ उपन्यासों से मनोहर श्याम जोशी ने उत्तर आधुनिक शिल्प और चिंतन की प्रतिष्ठा करने का जो सिलसिला शुरू किया था उसी को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने इस उपन्यास में कथा को ही कथानक बनाते हुए सत्य और गल्प की सीमा-रेखा को संशय के रंग में रँग दिया है।
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ट-टा प्रोफेसर: इस उपन्यास में मनोहर श्याम जोशी ने एक साधारण पात्र को महानायक और महामूढ़ के मिथकीय फ्रेम में मढ़ दिखाने वाले अपने कथा-कौशल का प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। विशिष्ट बनने के प्रयास में मामूली लोगों की दुनिया में गैर-मामूली ढंग से हास्यास्पद प्रतीत होने वाले मामूली प्रोफेसर ट-टा की हास्यास्पद लगने वाली मामूली प्रेम-कहानी में भी लेखक अमर प्रेम-कहानी के तत्त्व देखता और दिखाता है।
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हमज़ाद: मनोहर श्याम जोशी की पिछली कथाकृतियों की ही तरह यह उपन्यास भी कथ्य और शिल्प की दृष्टि से हिंदी कथा-संसार में एक नयी सड़क बनाता है। भाषा की बहुरंगी नोक-पलक पर अपने सर्वविदित अधिकार को भी फिर प्रमाणित करते हुए उन्होंने इस बार घटिया शाइर तख़तराम का भेस बनाकर ऐसा गद्य लिखा है जो निश्चय ही उर्दू को हिंदी की ही शैली मानने वाले हिंदी-प्रेमियों को और देवनागरी में फ़ारसी सही लिखने का आग्रह करने वाले उर्दूपरस्तों को समान रूप से सुखी-दुखी करेगा।

Manohar Shyam Joshi

मनोहर श्याम जोशी 9 अगस्त, सन् 1953 को अजमेर से जन्मे, लखनऊ विश्वविद्यालय के विज्ञान स्नातक मनोहर श्याम जोशी 'कल के वैज्ञानिक' की उपाधि पाने के बावजूद रोजी-रोटी की खातिर छात्र जीवन से ही लेखक और पत्रकार बन गए । अमृतलाल नागर और अज्ञेय इन दो आचार्यों का आशीर्वाद उन्हें प्राप्त हुआ । स्कूल मास्टरी, क्लर्की और बेरोजगारी के अनुभव बटोरने के बाद अपने 21वें वर्ष से वह पूरी तरह मसिजीवी बन गए । प्रेस, रेडियो. टी. वी., वृत्तचित्र, फिल्म, विज्ञापन-संप्रषण का ऐसा कोई माध्यम नहीं, जिसके लिए उन्होंने सफलतापूर्वक लेखन-कार्य न किया हो । खेल-कूद से लेकर दर्शनशास्त्र तक ऐसा कोई विषय नहीं, जिस पर उन्होंने कलम न उठाई हो । आलसीपन और आत्मसंशय उन्हें रचनाएँ पूरी कर डालने और छपवाने से हमेशा रोकते रहे । पहली कहानी तब छपी जब यह अठारह वर्ष के थे, लेकिन पहली बडी साहित्यिक कृति तब प्रकाशित करवाई जब सैंतालीस वर्ष के होने आए । केंद्र सूचना सेवा और टाइम्स ऑफ़ इंडिया समूह से होते हुए जोशी जी सन् 1967 में हिंदुस्तान टाइम्स में साप्ताहिक हिंदुस्तान के संपादक बने और वहीं एक अंग्रेजी साप्ताहिक का भी संपादन किया । टेलीविजन धारावाहिक 'हम लोग' लिखने के लिए सन 1984 में संपादक की कुर्सी छोड दी और तब से अंत तक स्वतंत्र लेखन करते रहे ।
स्मृति शेष : 30 मार्च 2006

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