Mein Bhi Aurat Hoon

Ansuya Tyagi

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  • Year: 2011

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Parmeshwari Prakashan

  • ISBN No: 9788188121908

मैं भी औरत हूँ
‘हे भगवान् ! ओंकार चुप क्यों हो गया है ? क्या अब वापस वही स्थिति आ पहुँची है, जिससे मैं अब तक डरती आई हूँ ? जिस सच्चाई को जानकर पिछले दो पुरुष--नकुल व सौरभ--मुझे छोड़कर चले गए थे--एक प्रकार से मुझे ठुकराकर--बल्कि सौरभ ने तो अपनी पौरुष की कमी ही मेरे सिर पर थोप दी थी, मुझे ही दोषी ठहरा दिया था--पर ओंकार तो मुझसे शादी कर चुका है। क्या वह अब मुझसे तलाक लेने की सोचेगा ? कितनी जगहँसाई होगी, यदि कोर्ट में यह केस गया तो। सब मुझ पर कितना हँसेंगे ! कहेंगे, अरे, जब भगवान् ने ही तुझे इस लायक नहीं बनाया तो क्यों इच्छा रखती है वैवाहिक जीवन जीने की ! क्या संन्यासिनें इस दुनिया में नहीं रहतीं ? विधवाएँ नहीं रहतीं ? क्या कामक्रीड़ा इतनी अधिक महती आवश्यकता बन गई, जो इसने पूरी सच्चाई अपने होने वाले जीवनसाथी को भी नहीं बताई ? क्या पता, मीडिया इस बात को बहुत अधिक उछाल दे ! आखिर उन्हें तो एक चटपटा मसाला चाहिए लोगों को आकर्षित करने का। जिस बात को मैं इतने वर्षों से छुपाती आई हूँ, वही दुनिया के सामने मुझे नंगा कर देगी। इस नग्न सच्चाई को जानकर लोग मेरे माता-पिता को कितनी दयनीय दृष्टि से देखेंगे ! ओह ! इस वृद्धावस्था में क्या मेरे पापा, मेरे दादा जी ऐसी बातें सहन कर पाएँगे ?’
(इसी पुस्तक से)

Ansuya Tyagi

डॉ. अनुसूया त्यागी
जन्म-स्थान : कोटा, राजस्थान
शिक्षा : प्रारंभिक शिक्षा कोटा में
एम.बी.बी.एस., रवीन्द्रनाथ मेडिकल कॉलेज, उदयपुर; एम.एस. ग्यानेकोलॉजी एवं आब्सटेट्रिक, सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज, जयपुर
पिछले 35 वर्ष से देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में स्वास्थ्य संबंधी लेख एवं कहानियाँ प्रकाशित
लेखन के अतिरिक्त चित्रकला एवं पाककला में भी रुचि, सामाजिक कार्यों व सेवा-कार्यों में भी समय-समय पर हिस्सा लेकर अपना योगदान देती रही हैं
राजस्थान में कोटा, दिल्ली में हिंदूराव अस्पताल तथा स्वामी दयानंद अस्पताल में राजकीय सेवा के पश्चात् गाजियाबाद (उ.प्र.) में स्वयं का नरसिंग होम संचालित कर रही हैं।
ऑल इंडिया डॉक्टर्स मेडिकल एसोसिएशन, गाजियाबाद शाखा की अध्यक्ष एवं ग्यानेकोलॉजी एवं आब्सटेट्रिक्स, गाजियाबाद 
की अध्यक्ष रह चुकी हैं।
ऑल इंडिया त्यागी समाज एवं ऑल इंडिया ब्राह्मण समाज द्वारा सम्मानित
प्रकाशित कृतियाँ
‘रिश्तों का बोझ’, ‘उम्मीदों का कलश’, ‘किसके लिए’ (कहानी-संग्रह),  ‘लेबर रूम’ (डॉक्टरी जीवन के संस्मरण)

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