Naani Amma Maan Jao

Krishna Agnihotri

Availability: In stock

Seller: KGPBOOKS

Qty:
495.00 446 + Free Shipping


  • Year: 2010

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788189859930

नानी अम्मा मान जाओ
इस उपन्यास  में चार पीढ़ियों को कहानी के माध्यम से बाल विवाह से लेकर आधुनिक दौर को स्थितियों का चित्रण है।  चूँकि उपन्यास का कालखंद बहुत बढा है, इसलिए बहुत सारी समम्याएँ टुकड़ों-टुकडों में देखने को मिलती हैं । इसमें पारिवारिक बिखराव, राजनितिक भ्रष्टाचार, सेक्स के प्रति खुलापन, विकृत सेक्स, अति आधुनिकता,  नई पीढ़ी के द्वंद्वआदि का  चित्रण है । 
अगली पीढ़ी तथा पिछली पीढ़ी के टकराव के साथ कहानी आगे बढ़नी है । कहानी बातचीत की शैली में कही गई है तथा कहानी में सिनेमाई दृष्टिकोण लक्षित होती है । 
 इसमें बताया गया है कि एक पीढ़ी का सेक्स के प्रति खुला रवैया है तो एक पीढी सेक्स के प्रति शुचिता की बात करती हैं लेकिन भीतर ही भीतर वह घुटती है । बाद में उसे अपना यह रवैया बदलना पड़ता है । यह रवैया नानी अम्मा बदलती है।

Krishna Agnihotri

कृष्णा अग्निहोत्री
कृष्णा अग्निहोत्री जो सदा वाद-विवादों को तहस-नहस कर जीवटता एवं संघर्ष की रचनाओं में अपने तीखे तेवर प्रस्तुत करती आ रही हैं। शासकीय कन्या महाविद्यालय खंडवा से रिटायर्ड ।
जन्म : नसीराबाद राजस्थान में ।
अब तक कई सम्मान व दो-चार पुरस्कार प्राप्त ।
अब तक छपी पुस्तकें :-
कहानी संग्रह : टीन के घेरे, गीताबाई, याहि बनारगी रंग बा, नपुंसक, दूसरी औरत, विरासत, सर्पदंश, जिंदा आदमी, जै सियाराम, अपने-अपने कुरुक्षेत्र, यह क्या जगह है दोस्तों, पंछी पिंजरे के और मेरी प्रतिनिधि कहानियां ।
उपन्यास : बात एक औरत की, टपरेवाले, कुभारिकाएँ, बौनी परछाइयाँ, अभिषेक, टेसू की टहनियाँ, निष्कृति, नीलोफर, मैं अपराधी हूँ बित्ता भर की छोकरी, नानी अम्मा मान जाओ ।
बच्चों  पाँच कहानी-संग्रह, एक रिपोर्ताज, एक समीक्षा, एक आत्मकथा ।

Scroll