Sampurna Upnanayas : Himanshu Joshi ( 2Vols.)

Himanshu Joshi

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  • Year: 2019

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-81-939334-2-8

संपूर्ण उपन्यास: हिमांशु जोशी का संपादन दो भागों में चर्चित कथाकार और आलोचक महेश दर्पण ने किया है। उन्होंने सन् 1965 में प्रकाशित हिमांशु जोशी के पहले उपन्यास से लेकर सन् 1980 में प्रकाशित तीन लघु उपन्यासों तक की रचनाओं को दो खंडों में विभाजित किया है। पहले खंड में ‘अरण्य’, ‘महासागर’, ‘छाया मत छूना मन’ और ‘कगार की आग’ को एक साथ प्रस्तुत किया गया है। दूसरा खंड पांच उपन्यास लिए है-‘समय साक्षी है’, ‘तुम्हारे लिए’, ‘सुराज’, ‘अंधेरा और’ तथा ‘कांछा’। यह कहना अनिवार्य है कि ‘संपूर्ण उपन्यास: हिमांशु जोशी’ पढ़ते हुए पाठक आजादी के बाद के भारत की धड़कती हुई। तस्वीर से साक्षात्कार कर सकेंगे। 

Himanshu Joshi

हिमांशु जोशी
अग्रणी कथाकार
गत चालीस वर्षों से लेखन से सक्रिय
उपन्यास : कगार की आग ० अरण्य ० महासागर ० तुम्हारे लिए ० छाया मत छूना मन ० सु-राज ० समय साक्षी है
कहानी-संग्रह : अंतत: ० मनुष्य-चिह्न ० जलते हुए डैने ० इस बार फिर बर्फ गिरी तो आदि
कविता-संग्रह  : नील नदी का वृक्ष
यात्रा-वृतांत : यात्राएँ
भेटकर्ता : मेरे साक्षात्कार 
'यातना शिविर' में कालापानी की अनकही कहानी आदि विशेष चर्चित
समस्त भारतीय भाषाओं के अतिरिक्त कुछ रचनाएँ अंग्रेजी, स्लाव, चेक, बर्मी, जापानी, चीनी, कोरियन, नार्वेजियन आदि में भी अनूदित हुईं । रंगमंच तथा चित्रपट के माध्यम से भी कईं कृतियों का प्रदर्शन हुआ । दूरदर्शन तथा रेडियों-धारावाहिक के रुप में भी ।
हिंदी अकादमी दिल्ली, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, बिदार राजभाषा द्वारा अनेक कृतियां सम्मानित । 'केंद्रीय हिंदी संस्थान' (मानव संसाधन मंत्रालय) द्वारा 'गणेश शंकर विद्यार्थी सम्मान' से पुरस्कृत ।

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