Saptam Abhiyaan

Sunil Gangopadhyaya

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  • Year: 2010

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788170161844

सप्तम अभियान
अपनी की आकांक्षाएँ, लिप्साएँ उसे कहाँ से कहाँ तक पहुँचा देती हैं इसका जीवंत चित्रण 'सप्तम अभियान' में सुनील गंगोपाध्याय ने किया है । आपसी द्वंद्व, घृणा, कुंठा, अतृप्ति आदि से भागकर आदमी प्रेम और सहयोग की तलाश करता है, दर-दर भटकता है, परन्तु अन्तत: पाता है कि हर जगह एक-सी ही स्थितियाँ व्यक्ति और समाज को घेरे हुए है । छोटे-छोटे स्वार्थ से लेकर बड़ी-बड़ी महत्त्वकांक्षाओं की पूर्ति तक मनुष्य को क्या-क्या नहीं करना पडता, कैसे-कैसे रूप नहीं धारण करने पडते ? व्यक्ति के अन्तरमन की इन्हीं उलझनों को दर्शाता है यह उपन्यास ।  साथ ही यह भी कि मनुष्य जीवन में असफलताओं का दौर चलता ही रहता है किन्तु व्यक्ति अगर साहस न छोडे, प्रयास-विमुख न हो तो सफलता उसको मिलती ही है, वह अपने अभियान में सफल होता ही है ।
साहित्य अकादमी से पुरस्कृत बंगला लेखक सुनील गंगोपाध्याय का एक ऐसा रहस्यात्मक और रोमांचक स्थितियों से भरपूर उपन्यास जिसे बीच में छोड पाना किसी भी पाठक के लिए असंभव है ।

Sunil Gangopadhyaya

सुनील गंगोपाध्याय
समकालीन बांग्ला लेखकों में सर्वाधिक चर्चित-प्रशंसित कथाकार, उपन्यासकार एवं कवि । जन्म 7 सितंबर, 1934, फरीदपुर (अब बांग्लादेश) में । लिखने की ललक इतनी अधिक रही कि 'नीललोहित' तथा 'सनातन पाठक' के छद्म नाम से भी लेखन किया । 'कृतिवास' नामक पत्रिका का पच्चीस वर्षों तक संपादन एवं प्रकाशन किया । 'सेई समय' नामक महाकाव्यात्मक उपन्यास के लिए वर्ष 1985 में साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित । अब तक करीब साठ पुस्तकें प्रकशित ।

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