Saryu Didi

Manorma Jafa

Availability: In stock

Seller: KGPBOOKS

Qty:
175.00 158 + Free Shipping


  • Year: 2009

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788188236473

सरयू दीदी
मैंने फोन मिलाया। गोपाल जोशी सुनाकर सदके में आ गए, 'यह नहीं हो सकता। मैं अभी पता लगाता हूँ।' उन्होंने फोन रख दिया।
'क्या करूं मनु?' दीदी की आवाज में बेबसी थी। वही तो सदा समझदार रहीं। वही तो हर प्रश्न का उत्तर और हर समस्या का हल ढूंढ़ लेती थीं। पर यहां वह किंकर्त्तव्यविमूढ़-सी थीं ।  वह उठकर कमरे में टहलने लगीं । 'अभी तो जीवन शुरू ही हुआ था मनु।' दीदी ने हाथ जोड़े ऊपर देखा, आंखें बंद कीं और जोर से बोली, 'हे ईश्वर आप ही माता है आप ही पिता हैं। हे ईश्वर आप ही सबकी रक्षा करने वाले हैं। हे ईश्वर मुझे ठीक सोचने-समझने की शक्ति दीजिए। मुझे बल दीजिए। हे ईश्वर मुझे बल दीजिए।' दो क्षण बाद दीदी की आंखें झरने लगीं। थोडी देर बाद दीदी में शक्ति लौटकर आ गई, 'मनु मैं यब कुछ सह लूंगी। भगवान महान हैं, दयालु हैं।' मेरी तरफ़ मुड़कर बोलीं, 'मनु। पापा से पूछो अजीत को लेकर प्लेन कब आ रहा है?' वह उठकर दराज़ में से कूछ खोजने लगीं।
तभी फोन की घंटी बजी मैंने फ़ोन उठा लिया। उधर फोन पर मां थी, 'मनु अजीत को यहां अपने घर ले आते हैं। वही ठीक होगा। वहीं सरयूजी क्या करेंगी? '
मैं दीदी से पूछती हूँ। हिम्मत करके मैंने दीदी से पूछा। दीदी ने कहा, 'मनु! अजीत का घर यहीं है, वह यहीं आयेंगे ।'
मैंने जाकर मां को बता दिया।
-(इसी उपन्यास से)

Manorma Jafa

मनोरमा जफा
श्रीमती मनोरमा जफा एक सुप्रसिधद्ध लेखिका हैं। आपकी कहानियाँ 'धर्मयुग', 'कादम्बिनी' व 'साप्ताहिक हिंदुस्तान' में प्रकाशित हुई हैं। एक कहानी-संग्रह 'परिचित्ता तथा अन्य कहानियाँ' तथा एक उपन्यास 'देविका' 'किताबघर प्रकाशन' से प्रकाशित हुए हैं। 'देविका' को हिन्दी अकादमी दिल्ली द्वारा साहित्य कृति सम्मान से सम्मानित किया गया है। आपकी कृतियों में संवेदनशील भावनाओं तथा समाज के बंधनों से बंधी, परिस्थितियों से जूझती हुई स्त्री के मर्मभेदी वर्णन हैं, जो पाठकों को पुन: विचार करने के लिए बाध्य कर देते हैं। आपका बाल-साहित्य में बड़ा योगदान रहा है। आप बाल-साहित्य विशेषज्ञ हैं  और तीन दशक से बल-साहित्य लेखन कार्यशाला का संचालन कर आपने भारत में बाल-साहित्य को एक नई दिशा दी है। आप हिन्दी व अंग्रेजी दोनों भाषाओँ में लिखती हैं। आपकी अनेक बाल-पुस्तकों का विदेशी भाषाओं में भी अनुवाद हुआ है व पुरस्कृत हुई हैं।

Scroll