Triya Hath

Maitreyi Pushpa

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  • Year: 2011

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788170167485

बेतवा बहती रहीपुस्तक को पाठकों ने सराहा। उसके प्रत्याशित अंत पर बहुत-सी स्त्रियाँ मुग्ध हुईं और रो पड़ीं। फोन आएपत्र आए। हम आपस में संगति बिठाते हुए एकमएक नजर आए। आप मानें या  मानेंमगर यहीं कहानी प्रभावहीन हो गई। विगलन और आँसुओं में वह ताकत कहाँजो कथा को सफल ही नहींसार्थक भी बना दे। इसी आधार पर बेतवा बहती रहीपढ़िए और तब तक कोई राय  बनाइएजब तक कि प्रस्तुत पुस्तक में आए पात्रों से जुड़ी यह दूसरी कहानी  पढ़ लें। 

यह मैं इसलिए कह रही हूँ कि मेरी करुणाजनित कथा क्रंदन भरी पुस्तक के बारे में आप सुन चुके हैं या पढ़ चुके हैंजिसने अपनी विस्तारवादी प्रकृति से वास्तविकता और गल्प के अंतर को मिटा डाला। लेकिन गल्प ही तो ऐसा सशक्त साधन हैजो वास्तविकता का सच्चा भरोसा देता चलता है।

आज का युवा समीक्षक कहता हैµकथानक और कथ्य का साँचा घिसा हुआ हो तो अच्छी या सार्थक कहानी की संभावना पर प्रश्नचिन्ह लग जाता है।इसी वाक्य की रोशनी में मैं अपनी भावनाओं को समझने का प्रयास करती हूँ और उन पात्रों के लिए कसौटी बनाती हूँजो बेतवा बहती रहीउपन्यास में आए हैं। त्रिया-हठउन्हीं पात्रों के खरे और खोटेपन की कहानी है

मैत्रेयी पुष्पा  

Maitreyi Pushpa

मैत्रेयी पुष्पा
जन्म : 30 नवंबर, 1944, अलीगढ़ जिले के 'सिकुर्रा' गांव से
आरंभिक जीवन : जिला झाँसी के 'खिल्ली' गाँव में
शिक्षा : एम० ए० (हिंदी साहित्य) बूंदेलखंड कॉलेज, झाँसी
प्रकाशित रचनाएं : बेतवा बहती रही, इदन्नमम, चाक, झूला नट, अल्मा कबूतरी, विजन, अगनपाखी, कही ईसुरी फाग (उपन्यास); गोमा हंसती है, ललमनियाँ, चिन्हार (कहानी); कस्तूरी कुंडल बसै (आत्मकथा), खुली खिड़कियाँ (स्त्री-विमर्श)
- 'फैसला' कहानी पर टेलीफिल्म 'बसुमती की चिटूठी'
- 'इदन्नमम' उपन्यास पर आधारित साँग एंड ड्रामा डिवीजन द्वारा निर्मित छायाचित्र 'संक्रांति'
सम्मान-पुरस्कार : 'सार्क लिटरेरी अवार्ड' और 'द हंगर प्रोजेक्ट' द्वारा दिए गए 'सरोजिनी नायडू पुरस्कार' के अतिरिक्त अनेक राष्ट्रीय एवं प्रादेशिक पुरस्कारों से सम्मानित

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