Unke Hastakshar

Amrita Pritam

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  • Year: 2014

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788170161189

उनके हस्ताक्षर
० एक लम्बा रास्ता गुजर गया, जब एक उपन्यास लिखा था, डॉक्टर देव । अब चालीस साल के बाद जब मैंने उसे फिर से देखा, लगा-उसका  हिन्दी अनुवाद अच्छा नहीं हुआ है । मन में आया, अगर उसका अनुवाद मैं अब स्वयं करूँ, तो उसकी रगों में कुछ धड़कने लगेगा और यही जब करने लगी, तो बहुत कुछ बदल गया ।
० इसी तरह एक मुद्दत हो गई, एक उपन्यास लिखा था…'घोंसला' । प्रकाशित हुआ तो बाद में किफायती संस्करण 'नीना' नाम से चलता रहा । आज उसे देखकर लगा कि वह उस कदर पुख्ता नहीं हो पाया था, जो होना चाहिए था । और उसी को अब फिर से लिखा है, जिससे वह सघन भी हो पाया है और पुख्ता भी ।
० इसी तरह कभी एक कहानी लिखी थी ‘पाँच बहनें-और उस कहानी को लेकर जब किसी ने फिल्म बनाने की बात की, तो मैंने कहानी को फिर से देखा । अहसास हुआ कि इस जमीन पर जो कहा जा सकता था, वह कहानी में नहीं उतर पाया था। यह अहसास कुछ इस तरह मेरा पीछा करने लगा कि एक दिन मुझे पकड़कर बैठ गया । कुछ और मसले भी थे, जो कहानी में नहीं आ पाए थे । और उन सबको लेकर पाँच की जगह सात श्रेणियों के किरदार सामने रखे और उन सबको कागज़ पर उतार दिया । अब उसे नाम दिया है-उनके हस्ताक्षर' ।
-अमृता प्रीतम

Amrita Pritam

अमृता प्रीतम
(वास्तविक नाम-अमृत कौर)
जन्मतिथि : 31 अगस्त, 1919
जन्मस्थान : गुजरांवाला (अब पाकिस्तान में)
प्रकाशित कृतियाँ : उनके हस्ताक्षर, ना राधा ना रुक्मणी, कम्मी और नंदा, रतना और चेतना (उपन्यास); दस प्रतिनिधि कहानियां, अलिफ लैला : हजार दास्तान, कच्चे रेशम सी लड़की (कहानी-संग्रह); रसीदी टिकट (आत्मकथा); खामोशी से पहले (कविता-संग्रह) मेरे साक्षात्कार (सं० : अस्मा सलीम तथा श्याम सुशील), मन मंथन की गाथा (सं० : इमरोज) (साक्षात्कार/लकरीरें); एक थी सारा, काया के दामन में, शक्तिकणों की लीला, काल-चेतना, अज्ञात का निमंत्रण, सितारों के संकेत, सपनों की नीली सी लकीर, अनंत नाम जिज्ञासा (आध्यात्मिक सत्यकथाएँ); सितारों के अक्षर किरनों की भाषा, मन मिर्जा तन साहिबाँ, अक्षर कुण्डली, वर्जित बाग की गाथा (सं० : अमृता प्रीतम), बेवतना (सं० : अमृता प्रीतम) (चिंतन/संस्मरण/रेखाचित्र आदि)।
पुरस्कार-सम्मान : साहित्य अकादेमी पुरस्कार 'सुनेहड़े' (कविता-संग्रह : 1956), भारत के राष्ट्रपति द्वारा पदमश्री सम्मान (1969), भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार 'कागज ते कैनवस' (कविता-संग्रह :  1981) तथा पदमबिभूषण सम्मान (2004) के अलावा अन्य बहुत-से पुरस्कारों-सम्मानों से अलंकृत ।

स्मृति-शेष : 31 अक्तूबर, 2005

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