Rang De Basanti Chola

Bhishm Sahni

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  • Year: 2014

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788170163091

रंग दे बसन्ती चोला
[जलियाँवाला बाघ रतनदेवी आती है । हाथ में पानी का लोटा है ।]
रतनदेवी : ले मेरे लाल । मैं तेरे लिए पानी लाई हूँ। (किश्ना के होंठों से पानी डालती है ।) तू बोलता क्यों नहीं किश्ना बेटे । (माथे को छुकर) चला गया, यह भी चला गया । इसकी भी प्यास बुझ गई । मैं कर्मजली तेरे होंठों में दो बूँट पानी भी नहीं डाल पाई । तू भगवान् को प्यारा हो गया है। (रो पड़ती है, फिर धीरे से उठकर अपने पति के शव के पास पहुंचती है। ) तू भी भगवान् के पास जा रहा है । मैं रोऊँगी नहीं । मैं तेरा सफर खराब नहीं करूँगी । हँसता-हँसता जा। भगवन् तुझे गले लगाएंगे ।
तेरे सैकडों संगी-साथी मौत की नींद सोए पडे हैं । वे भी तेरे साथ भगवान् के दरबार में जाएँगे। उनके घरवाले अभी भी उनकी राह देख रहे हैं। 
तूने अपने लिए कभी कुछ नहीं माँगा । तू अपनी जान निछावर कर गया । मैं पापिन तुझे सारा वक्त उलाहने देती रही । तेरे साथ झगड़ती रही, पर मुझे क्या मालूम था, तू सचमुच चला जाएगा । (उसका माथा सहलाती हुई) मैं कहाँ लुट-पुट गई ? मैं तो चिर सुहागिन हूँ । जिसका घरवाला ऐसा शूरवीर हो । तू तो मेरा सूरमा पति है । तू तो नाचता-गाता हुआ घर आया करता था : मेरा रंग दे, मेरा रंग दे बसन्ती चोला ।
-(इस पुस्तक से)

Bhishm Sahni

भीष्म साहनी जन्म : 8 अगस्त, 1915 जन्म-स्थान : रावलपिण्डी शिक्षा : एम०ए० ,पी-एच० डी० वर्षों तक दिल्ली विश्वविद्यालय में अंग्रेजी साहित्य में अध्यापन-कार्य किया । 1980 में अवकाश ग्रहण किया । अब तक छह उपन्यास, पाँच नाटक, नौ कहानों-समग्र प्रकाशित हुए है । सात माल (1957 से 1963) मास्को में अनुवाद-कार्य, टाल्सटॉय की अनेक कृतियों का हिन्दी में अनुवाद किया । 1965-67, में 'नई कहानी' पत्रिका का संपादन । 1976 में 'तमस' उपन्यास पर साहित्य अकादमी पुरस्कार । इसके अतिरिक्त शिरोमणि लेखक (पंजाब) और लोटस (अफ्रो-एशियायी लेखक संध) आदि पुरस्कारों से सम्मानित ।
स्मृति-शेष : 11 जुलाई, 2003

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